पंचायत चुनाव के तैयारी में जुटे बेनीवाल, चप्पे-चप्पे पर बिठा रहे अपने सिपाही

Rajasthan Panchayat Elections: सूबे की भजनलाल सरकार पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनावों को करवाने में देरी कर रही है। जिसे लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार हमलावर हो रहा है। इधर दूसरी तरफ, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल चुनाव की तैयारी में लग गए हैं। इसे लेकर जयपुर में RLP की हाल ही में बैठक भी हुई थी। इस मीटिंग में पार्टी की ग्राउंड स्ट्रेटेजी की बात हुई थी। बेनीवाल अच्छे से जानते हैं कि चुनाव केवल भाषणों से नहीं, बल्कि बूथ मैनेजमेंट से जीते जाते हैं।
बूथ स्तर युवा चेहरों की तैनाती
पार्टी के प्रदेश प्रभारी दिलीप चौधरी ने साफ कर दिया है कि RLP बहुत जल्द एक 'स्पेशल मेंबरशिप ड्राइव' शुरू कर रही है। इनका टारगेट सीधा बूथ स्तर पर नए और युवा चेहरों को जोड़ना है। RLP का कोर वोटर हमेशा से किसान, युवा और महिलाएं रही हैं। बेनीवाल अपनी इस ताकत को जिला और विधानसभा स्तर पर फिर से री-एक्टिवेट कर रहे हैं।
वहीं RLP का ये कदम बीजेपी और कांग्रेस, दोनों के लिए टेंशन बढ़ाने वाला है। अगर बेनीवाल ग्रामीण इलाकों में अपना बूथ मजबूत करने में कामयाब रहे, तो वो आने वाले स्थानीय चुनावों में 'किंगमेकर' की भूमिका में आ सकते हैं। ये तो कुछ नहीं अब रणनीति बनाने के साथ-साथ बेनीवाल ने भजनलाल सरकार की दुखती रग पर हाथ रख दिया—वो है प्रदेश की कानून-व्यवस्था। बेनीवाल ने सीधे मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र पर ही सवाल उठा दिए कि जब मुखिया के खुद के इलाके में अपराधी बेखौफ हैं, तो बाकी राजस्थान का क्या हाल होगा?
मुखर विपक्ष के तौर पर खुद को पेश करना चाहते हैं बेनीवाल
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बेनीवाल का ये हमला सिर्फ एक बयानबाजी नहीं है। वो जनता की रोजमर्रा की समस्याओं जैसे क्राइम और हेल्थ को उठाकर खुद को एकमात्र मुखर विपक्ष के तौर पर पेश करना चाहते हैं, खासकर तब जब कांग्रेस अंदरूनी खींचतान में उलझी नजर आती है। इस महामंथन में खींवसर के पूर्व विधायक नारायण बेनीवाल, मेड़ता की पूर्व विधायक इंदिरा देवी बावरी, पूर्व नौकरशाह प्रभातीलाल जाट और सीनियर लीडर सीताराम नायक जैसे दिग्गजों ने शिरकत की।
इन चेहरों की मौजूदगी बताती है कि RLP के पास अनुभव और जोश दोनों का कॉम्बिनेशन है। कुल मिलाकर देखें तो हनुमान बेनीवाल ने बिगुल फूंक दिया है। अब देखना ये होगा कि क्या भजनलाल सरकार इस घेराबंदी का जवाब दे पाती है, या फिर ग्रामीण इलाकों में आरएलपी की यह रणनीति बड़ा उलटफेर करने वाली है।
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