Hanuman Beniwal के खौफ से BJP में हड़कंप, RLP प्रत्याशियों पर बनाया जा रहा नामांकन वापिस लेने का दबाव!

निकाय चुनाव के रण में सियासत की तपिश अब अपने चरम पर पहुंच चुकी है! बाड़मेर से लेकर फलोदी तक-नामांकन वापसी के आखिरी दौर में ऐसा सियासी बवाल मचा है कि प्रशासनिक दफ्तरों से लेकर गलियों तक पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ रहा है. आरोप लग रहे हैं दबाव के, बाहुबल के और सत्ता के रसूख के! सबके बड़े सवाल-क्या चुनावी मैदान जीतने के लिए प्रत्याशियों पर दबाव बनाया जा रहा है? बाड़मेर नगर परिषद के वार्ड नंबर 43 का वाकया देखिए. यहां RLP प्रत्याशी धर्माराम प्रजापत जैसे ही अपना नामांकन वापस लेने SDM दफ्तर पहुंचे, बाहर का माहौल जंग का मैदान बन गया!
SDM कार्यालय के ठीक बाहर RLP और BJP कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए. तीखी बहस... धक्का-मुक्की... और देखते ही देखते जमकर हंगामा हुआ. आरोप है कि दोनों पक्षों के बीच करीब 5 मिनट तक खींचतान चलती रही, जिसके बाद भारी पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह स्थिति को संभाला. RLP का सीधे तौर पर संगीन आरोप है कि वार्ड 43 के उनके प्रत्याशी पर राजनीतिक दबाव बनाया गया और उसी दबाव में उनसे नामांकन वापस करवाया गया. RLP इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की साजिश बता रही है.
दूसरी तरफ, प्रत्याशी धर्माराम प्रजापत और BJP ने इन आरोपों को खारिज किया है. प्रत्याशी का दावा है कि उन्होंने पारिवारिक सहमति और अपनी इच्छा से यह कदम उठाया है. लेकिन सवाल बरकरार है-अगर सब कुछ सामान्य था, तो SDM दफ्तर के बाहर इस कदर हंगामा क्यों हुआ ? और बात सिर्फ बाड़मेर तक सीमित नहीं है! ऐसा ही एक और गरमाता हुआ मामला फलोदी से सामने आ रहा है. फलोदी नगर परिषद चुनाव में RLP की एंट्री से सियासी समीकरण पूरी तरह उलट गए हैं.
आरोप है कि वार्ड नंबर 33 से RLP की महिला उम्मीदवार अशी देवी के घर खुद विधायक और स्थानीय BJP नेता पहुंचे. RLP समर्थकों का दावा है कि वहां जाकर उम्मीदवार पर नामांकन वापस लेने का भारी मानसिक और राजनीतिक दबाव बनाया गया! फलोदी से लेकर बाड़मेर तक-RLP का कहना है कि उनकी बढ़ती मजबूती से विपक्षी खेमे में हार की बौखलाहट साफ नजर आ रही है.
नामांकन वापसी की प्रक्रिया तो कागजों में आधिकारिक तौर पर पूरी हो चुकी है, लेकिन इसने दोनों जिलों की राजनीति में बारूद भर दिया है. बाड़मेर के वार्ड 43 से लेकर फलोदी के वार्ड 33 तक, चुनावी गणित पूरी तरह बदल चुका है. अब देखना होगा कि RLP द्वारा लगाए जा रहे इन गंभीर आरोपों पर पुलिस-प्रशासन का रुख क्या रहता है और आने वाले दिनों में जनता इस सियासी शह-मात का क्या जवाब देती है.
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