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Sri Ganganagar: रात 3 बजे सड़क पर सोए बेनीवाल! किसानों के लिए डटे रहे नागौर सांसद

Sri Ganganagar: रात 3 बजे सड़क पर सोए बेनीवाल! किसानों के लिए डटे रहे नागौर सांसद
राजस्थान
11 Oct 2026, 03:18 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Hanuman Beniwal: ना कोई आलीशान होटल, ना कोई आरामदायक बिस्तर, रात के करीब 3 बजे वार्ता विफल हुई, तो नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल किसानों के साथ नेशनल हाईवे पर ही जमीन पर सो गए। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के बीच खुले आसमान के नीचे सोते बेनीवाल का वीडियो अब चर्चा में है। लेकिन सवाल है कि आखिर किसानों के इस आंदोलन में ऐसा क्या हुआ कि बेनीवाल को रात सड़क पर गुजारनी पड़ी?

किसानों का सिंचाई के पानी के लिए प्रदर्शन

दरअसल, राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के घड़साना और अनूपगढ़ क्षेत्र में सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। किसानों का कहना है कि नहरों में पर्याप्त पानी नहीं मिलने से उनकी खेती प्रभावित हो रही है। इसी मांग को लेकर किसान पतरोड़ा गांव के पास नेशनल हाईवे-911 पर भी प्रदर्शन कर चुके हैं।

इसी आंदोलन को समर्थन देने के लिए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल भी मैदान में उतर गए। बेनीवाल देर रात किसानों के बीच पहुंचे और उनकी मांगों को लेकर प्रशासन से बातचीत की।

रात के 3 बजे वार्ता विफल

लेकिन रात करीब 3 बजे तक चली वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला। इसके बाद बेनीवाल ने किसानों से दूरी बनाने के बजाय उनके साथ ही रात गुजारने का फैसला किया। वे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के बीच सड़क पर बिछी जमीन पर सो गए। अब इसी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

अब समझिए इसका सियासी मतलब, हनुमान बेनीवाल की राजनीति में किसान और ग्रामीण मुद्दे हमेशा अहम रहे हैं। ऐसे में किसानों के बीच रात बिताने की यह तस्वीर सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि आंदोलन के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर भी देखी जा रही है।

श्रीगंगानगर कूच कर रहे हैं बेनीवाल और किसान

वहीं, 11 अक्टूबर को आंदोलन के 32वें दिन बेनीवाल के नेतृत्व में किसानों का श्रीगंगानगर कूच भी चर्चा में है। किसानों ने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का रुख अपनाया है। प्रशासन के साथ आगे की बातचीत में क्या समाधान निकलता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

अब सवाल यही है—क्या किसानों के साथ सड़क पर रात बिताने और आंदोलन को नेतृत्व देने से सरकार पर दबाव बढ़ेगा, या सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसानों को अभी और लंबा संघर्ष करना पड़ेगा?


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