अस्पताल निर्माण के खिलाफ बंद जहाजपुर, विधायक VS जनता..आखिर क्या है माजरा?

जहाजपुर में अस्पताल को लेकर अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि सियासी टकराव की तस्वीर सामने आने लगी है। एक तरफ राज्य सरकार का करीब 44 करोड़ रुपये की लागत से उप जिला चिकित्सालय बनाने का प्रोजेक्ट है, तो दूसरी तरफ अस्पताल की प्रस्तावित जगह को लेकर जहाजपुर के लोगों का विरोध। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि अस्पताल बनेगा या नहीं, अब सवाल ये भी है कि अस्पताल आखिर कहां बनेगा?
क्या है ये मामला?
दरअसल राज्य सरकार जहाजपुर में मॉडल रोड स्थित नागदी बांध के पेटे में करीब 30 बीघा जमीन पर उप जिला चिकित्सालय का निर्माण करा रही है। लेकिन स्थानीय नागरिकों का एक वर्ग इस जगह का लगातार विरोध कर रहे हैं। अस्पताल बचाओ संघर्ष समिति का कहना है कि निर्माण स्थल कस्बे से काफी दूर है और यहां पहुंचना महिलाओं, बुजुर्गों और आम लोगों के लिए मुश्किल होगा। दूसरी बड़ी आपत्ति बांध के पास अस्पताल बनाए जाने को लेकर है।
समिति का आरोप है कि अस्पताल से निकलने वाला प्रदूषित पानी अगर सही तरीके से प्रबंधित नहीं हुआ तो इससे नदी और बांध का पानी प्रदूषित होने का खतरा है।
जहाजपुर बंद कर जताया विरोध
इन मांगों को लेकर पहले ज्ञापन दिए गए, लेकिन जब बात नहीं बनी तो समिति ने 11 अगस्त को जहाजपुर बंद का आह्वान किया। जिसके चलते मंगलवार सुबह करीब 7 बजे से जहाजपुर के बाजार बंद नजर आए। लोगों ने बाजार बंद रखकर विरोध दर्ज कराया। दोपहर 2 बजे उपखंड अधिकारी को ज्ञापन भी दिया गया।

MLA गोपीचंद मीणा ने कांग्रेस पर लगाया जनता को बरगलाने का आरोप
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा राजनीतिक एंगल तब सामने आया, जब विधायक गोपीचंद की ओर से बाजार खुलवाने की पहल की गई, लेकिन इसके बावजूद बंद को समर्थन मिला। गोपीचंद मीणा ने तो ये भी कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस लोगों को भड़काने की कोशिश कर रही है।
दावे किए जा रहे हैं कि मुस्लिम समाज और मुस्लिम सदर की तरफ से अस्पताल निर्माण के समर्थन की बात सामने आई है, जबकि दूसरे सामाजिक संगठनों के समर्थन को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में इस पूरे मामले में सबसे जरूरी सवाल यही है—क्या प्रशासन जनता की आपत्तियों पर दोबारा विचार करेगा? क्या अस्पताल की प्रस्तावित जगह का तकनीकी और परीक्षण कराया जाएगा? और क्या सरकार जनता और जनप्रतिनिधि के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकालेगी? क्योकि अस्पताल किसी एक व्यक्ति का नहीं, .पूरे जहाजपुर का होना है। अगर विरोध आगे भी जारी रहता है, तो इसका असर आने वाले नगरपालिका चुनाव और आगे विधानसभा की राजनीति तक दिखाई दे सकता है। ये तो आने वाला वक्त बताएगा। फिलहाल जहाजपुर में सवाल एक ही है—अस्पताल चाहिए, लेकिन कहां?
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