अभद्रता की, गालियां तक बकी, पुलिस ने RSS प्रचारक से की बदसलूकी, 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड

जिस पुलिस के कंधों पर जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, अगर उसी पुलिस पर गाली-गलौज और अभद्रता के आरोप लगने लगें, तो सवाल उठना लाजिमी है। मामला जयपुर ग्रामीण से दूदू के नरैना थाने का है.... जहां RSS के जिला प्रचारक के साथ कथित बदसलूकी ने पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि बीती रात गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों ने सांभर के RSS जिला प्रचारक को रास्ते में रोककर उनके साथ अभद्रता की और गाली-गलौज की।
RSS कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा
आरोप ये भी है कि पुलिसकर्मी जिला प्रचारक को हिरासत में लेकर थाने पहुंचे और उन्हें शांति भंग के आरोप में बैठा दिया। लेकिन जैसे ही इस घटना की जानकारी RSS कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों को मिली, उनका गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग नरैना थाने पहुंचे और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए।
6 पुलिसकर्मियों को किया सस्पेंड
प्रदर्शनकारियों ने मांग उठाई कि जिन पुलिसकर्मियों पर अभद्रता के आरोप लगे हैं, उन्हें तत्काल सस्पेंड किया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो। मामले की गंभीरता को देखते हुए सांभर सीओ मुकेश जोशी भी मौके पर पहुंचे। घंटों के हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद आखिरकार 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया।
यहां सवाल ये है कि क्या सिर्फ वर्दी पहन लेने से किसी पुलिसकर्मी को अभद्रता करने का अधिकार मिल जाता है? पुलिस की जिम्मेदारी कानून का पालन करवाना है, ना कि अपने व्यवहार से जनता का भरोसा कमजोर करना। सवाल है कि अगर पुलिस को पूछताछ करनी थी, तो क्या उसके लिए मर्यादा भूलना जरूरी था? क्या वर्दी की ताकत का मतलब किसी के साथ भी मनमाना व्यवहार करना है? कानून की रखवाली करने वालों से तो कानून के दायरे में रहकर काम करने की उम्मीद की जाती है।
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