होम/rajasthan/jaipur-muhana-police-station-rituraj-lohar-death-in-police-custody

जयपुर के मुहाना थाने में 19 साल के युवक की मौत, पुलिस पर टॉर्चर का आरोप, बिना केस दर्ज किए ही उठाया था

जयपुर के मुहाना थाने में 19 साल के युवक की मौत, पुलिस पर टॉर्चर का आरोप, बिना केस दर्ज किए ही उठाया था
राजस्थान
07 Oct 2026, 01:42 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Jaipur Police Custody Death Case: जयपुर के मुहाना थाने से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस कस्टडी में सुरक्षा और पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि 19 साल के युवक को बिना मुकदमा दर्ज किए पहले तो थाने लाया गया और फिर उसे थर्ड डिग्री टॉर्टर दिया गया। बेरहमी से मारपीट की गई और फिर कुछ घंटों बाद उसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि 13 दिन बाद SMS अस्पताल में उसकी मौत हो गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर 22 सितंबर को थाने लाए गए ऋतुराज के ऐसा क्या हुआ था कि 5 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई।

मामले के आरोपी बताए गए शख्स का बेटा था ऋतुराज

मामला शुरू होता है 22 सितंबर से भीलवाड़ा निवासी मनोज ने मुहाना थाने में परिवाद दिया था। आरोप था कि मंदसौर के प्रकाश लोहार ने दुबई से सस्ता सोना दिलाने के नाम पर उनसे 22 लाख रुपए लिए इसी शिकायत के बाद पुलिस तीन लोगों को थाने लेकर आई। दोपहर करीब 12 बजे प्रकाश के 19 साल के बेटे ऋतुराज को भी थाने लाया गया।

आरोप है कि अगले साढ़े तीन घंटे में उसके साथ मारपीट की गई। चश्मदीद होने का दावा करने वाले ललित और प्रह्लाद ने आरोप लगाया कि ऋतुराज को पुलिसकर्मियों ने पीटा, बाल खींचे और दीवार पर सिर दे मारा। इसके बाद उसे लॉकअप में बंद कर दिया गया।

फिर शाम करीब साढ़े तीन बजे एक संतरी की नजर ऋतुराज पर पड़ी। वो बेसुध था। उसे कमरे में लाया गया, उसने उल्टी की और फिर होश में नहीं आया। इसके बाद पुलिस उसे पहले एक निजी अस्पताल ले गई और फिर दूसरे अस्पताल में दूसरे नाम से भर्ती कराया गया।

दो अस्पतालों में अलग-अलग नाम और केस से कराया भर्ती

सबसे बड़ा सवाल यहां खड़ा होता है। अगर सब कुछ ठीक था तो ऋतुराज को अलग-अलग अस्पतालों में अलग-अलग नाम से क्यों भर्ती कराया गया। लकी हॉस्पिटल में उसे 'ऋषिराज' के नाम से भर्ती कराया गया। इसके बाद नारायणा हॉस्पिटल में 'ऋतु' नाम से भर्ती कराया गया।

इतना ही नहीं नारायणा हॉस्पिटल का करीब 96 हजार रुपए का बिल भी पुलिस ने भरा और इस मामले में एक और बेहद गंभीर आरोप सामने आया है। आरोप है कि अस्पताल में ऋतुराज के सांप काटने की कहानी बताई गई। यहां तक कि उसे 10 एंटीवेनम इंजेक्शन लगाए गए। लेकिन जांच में उसके शरीर पर सांप के काटने का कोई निशान नहीं मिला। ऋतुराज की मां को भी कथित तौर पर आखिर तक यही बताया जाता रहा कि उसे सांप ने काटा है। उधर, ऋतुराज की दो सीटी स्कैन रिपोर्ट में दिमाग में अंदरूनी चोट सामने आई।

दिमाग में गंभीर चोट लगने की वजह से मौत

SMS अस्पताल के डॉक्टर के मुताबिक उसके ब्रेन में डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी थी। डॉक्टर ने बताया कि ऐसी इंजरी कई कारणों से हो सकती है और सिर्फ सीटी स्कैन से ये तय नहीं किया जा सकता कि चोट किस वजह से लगी। ऋतुराज 13 दिन तक जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा और आखिरकार 5 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई।

पुलिस ने कहा- नहीं किया किसी तरह का टॉर्चर

अब मामले में न्यायिक जांच शुरू हो चुकी है और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पोस्टमार्टम भी कराया गया। लेकिन पुलिस इन आरोपों को नकार रही है। मुहाना थाना SHO मुकेश खराड़िया का कहना है कि परिवाद दर्ज होने के बाद पूछताछ के लिए ऋतुराज को लाया गया था। किसी ने टॉर्चर नहीं किया। उनका कहना है कि उल्टी होने पर उसे अस्पताल ले जाया गया और मामले की जांच ACP कर रहे हैं।

आखिर क्या छिपा रही पुलिस?

अब जांच एजेंसियों के सामने कई बड़े सवाल हैं। थाने में ऋतुराज के साथ आखिर क्या हुआ। उसके दिमाग में गंभीर चोट कैसे आई। अलग-अलग अस्पतालों में अलग-अलग नाम से भर्ती क्यों कराया गया। सांप के काटने की कहानी क्यों सामने आई और सबसे बड़ा सवाल कि क्या 19 साल के ऋतुराज की मौत सिर्फ एक मेडिकल इमरजेंसी थी या फिर थाने में उसके साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसे छिपाने की कोशिश की गई। इन सवालों का जवाब जांच में सामने आएगा। लेकिन फिलहाल ये मामला जयपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बेहद गंभीर सवाल जरूर खड़ा कर चुका है।


इस लिंक को शेयर करें

ads

लेटेस्ट खबरें

ads
© 2026 Bharat Raftar. All rights reserved. Powered By Zentek.