पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में छात्रा का सुसाइड, फिर भी सीज़ नहीं हुई यूनिवर्सिटी, आखिर क्या छिपा रहा कॉलेज

जयपुर की पूर्णिमा यूनिवर्सिटी जहां छात्र अपने सुनहरे भविष्य के सपने लेकर आते हैं। जहां लाखों रुपये की फीस देकर अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने भेजते हैं। जहां उन्हें भरोसा होता है कि उनका बच्चा सुरक्षित हाथों में है। लेकिन सवाल है कि क्या पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में बच्चों की सुरक्षा की कोई गारंटी है?
एक 23 साल की MBA छात्रा यशस्वी रोहिल्ला, यूनिवर्सिटी की छठी मंजिल से नीचे गिरती है। उसकी मौत हो जाती है और पीछे छूट जाते हैं एक मां के सपने, एक परिवार की उम्मीदें और यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामने कई ऐसे सवाल, जिनका जवाब मिलना बेहद जरूरी है।
सबसे बड़ा सवाल आखिर एक छात्रा यूनिवर्सिटी की छठी मंजिल तक पहुंच कैसे गई? वहां सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? क्या छत पर जाने से रोकने की कोई व्यवस्था नहीं थी? क्या सुरक्षा सिर्फ कागजों और दावों तक सीमित थी? आखिर पूर्णिमा यूनिवर्सिटी प्रशासन की जवाबदेही कब तय होगी? और तो और सवाल यहां पुलिस से भी कि इतना बड़ा मामला हो जाने के बाद भी यूनिवर्सिटी को, जहां पर ये केस हुआ है, उसे सील क्यों नहीं किया गया, जहां इतना बड़ा हादसा हुआ है, ऐसा क्या है कि उस घटना की असलियत छिपाने की कोशिश की जा रही है।
MBA सेकेंड ईयर में थी यशस्वी, प्लेसमेंट भी हुआ था
जयपुर की पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में शनिवार को MBA सेकंड ईयर की 23 साल की छात्रा यशस्वी रोहिल्ला की मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यशस्वी यूनिवर्सिटी की छठी मंजिल से नीचे गिर गई। उसे तत्काल महात्मा गांधी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हैरानी की बात यह है कि यशस्वी के लिए जिंदगी में आगे बढ़ने का एक नया रास्ता भी खुला था। कुछ ही दिन पहले उसे नौकरी मिली थी। यूनिवर्सिटी के प्रबंध निदेशक राहुल सिंधी भी कह रहे हैं कि यशस्वी पढ़ाई में होशियार थी और उसे हाल ही में प्लेसमेंट मिला था। लेकिन आज वही यशस्वी इस दुनिया में नहीं है।
अब सवाल यूनिवर्सिटी प्रशासन से जानकारी के मुताबिक, घटना से कुछ देर पहले यशस्वी अपने क्लासमेट्स के साथ नॉर्मल थी। नॉर्मल तरीके से बातचीत कर रही थी फिर वो वॉशरूम जाने की बात कहकर क्लास से बाहर निकली। उसने फोन पर किसी से बातचीत की और अपना मोबाइल क्लास में छोड़कर छत की तरफ चली गई, कुछ छात्रों ने उसे छत पर देखा। उसे रोकने की कोशिश भी की गई, लेकिन वे समय पर नहीं पहुंच सके।
इन सवालों का नहीं मिला जवाब?
सवाल है कि जब यूनिवर्सिटी में इतनी बड़ी बिल्डिंग है, तो क्या छत पर जाने के रास्ते पर कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी?
क्या छठी मंजिल पर जाने के लिए किसी की अनुमति जरूरी नहीं थी?
क्या यूनिवर्सिटी में CCTV कैमरे लगे हैं? अगर लगे हैं तो उनकी फुटेज सामने क्यों नहीं लाई जा रही?
क्या यूनिवर्सिटी प्रशासन के पास इस बात का जवाब है कि घटना से पहले छात्रा कहां-कहां गई और किन हालातों में छत तक पहुंची?
आखिर इतने बड़े कॉलेज में छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
और सबसे बड़ा सवाल... अगर किसी छात्र को अचानक मदद की जरूरत पड़ जाए, तो क्या यूनिवर्सिटी में उसे समय पर मदद मिल सकती है?
परिवार में सिर्फ मां, पिता की कई साल पहले मौत
यशस्वी की मौत के बाद परिवार अस्पताल पहुंचा तो उनका दर्द और गुस्सा दोनों सामने आए। परिजनों ने यूनिवर्सिटी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।
परिवार का सवाल है कि आखिर एक छात्रा छठी मंजिल की छत तक पहुंची कैसे? वहां सुरक्षाकर्मी क्यों नहीं थे? सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? परिजनों ने नीरजा मोदी स्कूल की पिछली घटना के बाद राज्य सरकार की ओर से जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों का भी हवाला दिया।
अब सवाल यह है कि जब स्कूल-कॉलेजों के लिए सुरक्षा से जुड़े नियम मौजूद हैं, तो क्या इसका पालन करना यूनिवर्सिटी प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है? अगर सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी सामने आती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
एक मां की पूरी दुनिया उजड़ गई। इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू ये है कि यशस्वी के पिता का पहले ही निधन हो चुका था। मां दुर्गा देवी ही बेटी की पढ़ाई का खर्च उठा रही थीं। वह राजस्थान सचिवालय के सांख्यिकी विभाग में कार्यरत हैं। एक मां अपनी बेटी को पढ़ाकर आत्मनिर्भर बनाना चाहती थी। बेटी MBA कर रही थी। नौकरी भी मिल चुकी थी। परिवार को उम्मीद थी कि अब जिंदगी बेहतर होगी। लेकिन एक हादसे ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया।
बच्चों की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे?
यहां सवाल सिर्फ एक छात्रा की मौत का नहीं है। सवाल उस भरोसे का है, जो माता-पिता अपने बच्चों को कॉलेज और यूनिवर्सिटी भेजते वक्त करते हैं। वे लाखों रुपये की फीस देते हैं। क्या बदले में उन्हें अपने बच्चों की सुरक्षा का भरोसा मांगने का भी अधिकार नहीं है?
पूर्णिमा यूनिवर्सिटी प्रशासन से सवाल है? क्या किसी छात्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ उसके माता-पिता की है? क्या यूनिवर्सिटी की जिम्मेदारी सिर्फ फीस लेना, क्लास चलाना और प्लेसमेंट के विज्ञापन करना है? जब कोई अनहोनी होती है, तब क्या सिर्फ इमरजेंसी वाहन भेज देना ही प्रशासन की जिम्मेदारी पूरी कर देता है?
यशस्वी की मौत किन परिस्थितियों में हुई, ये पुलिस जांच का विषय है। अभी घटना के पीछे की वजह साफ नहीं है। लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर परिजनों ने जो सवाल उठाए हैं, उनका जवाब मिलना बेहद जरूरी है। पूर्णिमा यूनिवर्सिटी प्रशासन जवाब दीजिए। आखिर यशस्वी की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी?
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