जैसलमेर में 'ऑपरेशन क्लीन' का असर, ढहेगी 250 साल पुरानी दरगाह! प्रशासन ने मांगे कागज, नहीं दिखाने पर होगी कार्रवाई

Ramgarh Dargah removal notice Jaisalmer: सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन की ओर से ऑपरेशन क्लीन चलाया जा रहा है। इसी क्रम में जैसलमेर में इंटरनेशनल बॉर्डर के पास स्थित रामगढ़ कस्बे में 250 साल पुरानी मेहमूद शाह पीर जिलानी की दरगाह को हटाने का नोटिस प्रशासन ने दिया है। तहसीलदार ने राजस्थान उपनिवेशन अधिनियम के तहत नोटिस जारी कर दरगाह प्रबंधन से 22 जून तक जमीन के पक्के कागजात मांगे हैं। वहीं संतोष जनक जवाब नहीं मिलने पर 23 जून को दोपहर बाद कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। नोटिस जारी किए जाने के बाद मुस्लिम समाज के लोगों में भारी नाराजगी है।
प्रशासन की टीम ने 18 जून को दरगाह परिसर में दीवार कानूनी नोटिस चिपकाया था। इसमें लिखा था कि दरगाह से जुड़े लोग इस जमीन के कानूनी दस्तावेज पेश करें। अगर 22 जून तक सही जवाब नहीं दिए गए तो 23 जून को दोपहर 12 बजे के बाद इस निर्माण को हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसको लेकर मुस्लिम समाज में नाराजगी भी देखी जा रही है।
मुस्लिमों में नाराजगी
दरगाह के पक्ष में अपनी बात रखते हुए मुस्लिम कहते हैं कि सालों से यह दरगाह सांप्रदायिक सौहार्द और हिंदू-मुस्लिम आस्था का केंद्र है। मुस्लिमों के अलावा बड़ी संख्या में हिंदू भी यहां आकर मन्नत मांगते हैं। मामले को लेकर गांव के पूर्व सरपंच गोविंद भार्गव के तर्कों से हर कोई हैरान है।
गोविंद भार्गव ने बताया कि 1980 में भारतीय सेना यहां पर अपने मोर्चे और निर्माण का काम कर रही थी। तब सेना ने ग्रामीणों की अपील पर अपना काम किसी ओर जगह पर शिफ्ट किया था। उन्होंने बताया कि इस दरगाह का विकास स्थानीय लोगों के दान और सरकारी पंचायतों के सहयोग से हुआ है। वहीं कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अमरदीन फकीर ने प्रशासन को इस मामले में नरमी बरतने की अपील की है।
गृहमंत्री के दौरे के बाद एक्शन
बता दें कि कुछ दिनों पहले गृहमंत्री अमित शाह ने बीकानेर का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध निर्माण और जासूसी संबंधी गतिविधियों को रोकने के लिए प्रशासन को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इस दौरान उन्होंने इस निर्माण के लिए आने वाले फंड की जांच करने को भी कहा था। इसी क्रम में अब प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है।
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