कर्नाटक ने कर दी राजस्थान की फील्डिंग सेट? 2028 के ‘पायलट’ बनेंगे सचिन?

Sachin Pilot: हलचल हो रही है कर्नाटक में, लेकिन नतीजे राजस्थान के नजर आ रहे हैं। सियासी भूकंप उठ रहा है बेंगलुरु में और इसके झटके जयपुर की राजनीति में महसूस किए जा रहे हैं। जी हां, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने उनका इस्तीफा मंजूर भी कर लिया है और अब राज्य की कमान 'संकटमोचक' डी के शिवकुमार (D.K. Shivakumar) के हाथों में जाना पूरी तरह तय हो चुका है। आज वे सीएम पद की शपथ ले रहे हैं।
25 सितंबर 2022 को राजस्थान में आया था भूचाल
अब याद कीजिए राजस्थान की वो तारीख-25 सितंबर 2022 जिस बात की वजह से राजस्थान कांग्रेस में इतिहास की सबसे बड़ी बगावत हुई थी, जिस बात के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पूरे खेमे ने आलाकमान के खिलाफ बिगुल फूंक दिया था कि- अशोक गहलोत को कांग्रेस का अध्यक्ष नहीं बनने देंगे क्योंकि फिर उन्हें सीएम कुर्सी छोड़नी पड़ती। गहलोत खेमे में ये मैसेज जा रहा था कि अगर गहलोत ने सीएम की कुर्सी छोड़ी तो सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा तो कि उन्हें गंवारा नहीं था।
कर्नाटक में क्या हुआ?
लेकिन कर्नाटक ने कांग्रेस आलाकमान को एक नया लेसन, एक नया मॉडल दे दिया है। बेंगलुरु में जो हुआ, उसने दिखा दिया कि 'हाईकमान' अब बेहद शक्तिशाली मूड में है। 2023 के चुनाव के बाद जो 50-50 का फॉर्मूला यानी (आधा कार्यकाल सिद्धारमैया और आधा डीके शिवकुमार) तय हुआ था, उसे राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने बिना किसी ड्रामे के लागू करवा दिया है। सिद्धारमैया ने अपने मंत्रियों को ब्रेकफास्ट पर बुलाया, गले मिले, डीके ने पैर छूकर आशीर्वाद लिया और दिल्ली जाकर आलाकमान के सामने अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसे कहते हैं स्मूथ ट्रांसफर ऑफ पावर।
अब जरा किरदारों की तुलना कीजिए। कर्नाटक के सिद्धरमैया यानी राजस्थान के अशोक गहलोत-ओल्ड ब्रिगेड के सबसे कद्दावर नेता। और कर्नाटक के डी के शिवकुमार यानी राजस्थान के सचिन पायलट-पार्टी के सबसे बड़े क्राइसिस मैनेजर, जिनके पास युवाओं और कार्यकर्ताओं की भारी फौज है।
क्या कांग्रेस आलाकमान को समझ आई राजस्थान की उलझन?
तो सवाल उठता है कि क्या कर्नाटक का ये मॉडल अब राजस्थान में लागू होगा? जब आलाकमान को समझ आ गया है कि राजस्थान में मध्यांतर में सीएम ना बदलना और दोनों गुटों को संतुष्ट ना रख पाना एक ऐतिहासिक भूल थी, तो क्या 2028 के चुनाव से पहले सचिन पायलट को राजस्थान में 'सुपर-पावरफुल' बनाया जाएगा?
सचिन पायलट के समर्थक आज भी उतने ही वफादार हैं। उनके सड़क पर उतरते ही कार्यकर्ताओं में जो 'रोला' और जोश दिखाई देता है, वो कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत है। अगर आलाकमान ने कर्नाटक की तरह ही राजस्थान में भी चुनाव से पहले पायलट के नाम पर मुहर लगा दी, तो राजस्थान की सुस्त पड़ी कांग्रेस में नई जान आ सकती है।
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