होम/rajasthan/khatauni-fard-tatima-arabic-persian-words-rajasthan-government-documents

खतौनी, फर्द, ततिमा जैसे शब्दों में उलझ रहे राजस्थान के सरकारी कर्मचारी, अब क्या होगा आगे?

खतौनी, फर्द, ततिमा जैसे शब्दों में उलझ रहे राजस्थान के सरकारी कर्मचारी, अब क्या होगा आगे?
राजस्थान
11 Oct 2026, 03:54 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

राजस्थान के सरकारी कर्मचारियों के लिए नई मुश्किल खड़ी हो रही है। ये किसी और से नहीं बल्कि सरकारी कामकाज में इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ शब्द से हो रही है। खतौनी, तकसीम, मिसिल, हकूक, रकबा, फर्द, तरमीम और ततिमा... ये ऐसे शब्द हैं, जिनका अर्थ अच्छे-खासे पढ़े-लिखे लोग भी नहीं समझ पा रहे हैं। क्योंकि आम बोलचाल से लगभग गायब हो चुके ये अरबी-फारसी मूल के शब्द आज भी सरकारी दस्तावेजों में इस्तेमाल हो रहे हैं। जिससे विभाग में जुड़ रहे नए कर्मचारियों को बड़ी समस्या आ रही है।

इन सरकारी विभाग के शब्द सबसे मुश्किल

राजस्व विभाग में खतौनी, खसरा, तकसीम, मिसिल, मुंतखब, नकल, पैमाइश, तहरीर, हुज्जत, मुश्त और अमलदरामद जैसे शब्द उलझाते हैं। पुलिस विभाग में इस्तगासा, तफ्तीश, इत्तला, मुखबिर, मुनादी, रोजनामचा, मालखाना, पंचनामा, सुराग, तस्दीक, मुचलका, इश्तिहार, जिरह, रपट, मुल्जिम और फरियादी जैसे शब्द इस्तेमाल होते हैं।

वहीं न्याय और विधि विभाग में परिवाद, मुल्तवी, तामील, इकरार, हाजिरी, हुक्मनामा, कुर्की, नाजिर, वारंट और शिनाख्त जैसे शब्द आम लोगों के लिए परेशानी बनते हैं।

13वीं शताब्दी में मुगलों से साथ आए भारत ये शब्द

ये शब्द 13वीं सदी के दौरान मुगल शासन के चलते भारत आए। लेकिन अब सवाल है कि अब जब सरकारी कामकाज हिंदी में होता है, तो आम आदमी को सरकारी दस्तावेज समझने के लिए दूसरों पर निर्भर क्यों रहना पड़ता है?


इस लिंक को शेयर करें

ads

लेटेस्ट खबरें

ads
© 2026 Bharat Raftar. All rights reserved. Powered By Zentek.