किरोड़ी लाल मीणा ने क्यों कही पद छोड़ने की बात? क्या है इसके पीछे की कहानी

Kirodi Lal Meena: दौसा के नांगल राजावतन स्थित ऐतिहासिक मीणा हाईकोर्ट जो आदिवासी मीणा समाज के लिए न्याय, संस्कृति और स्वाभिमान का सबसे बड़ा प्रतीक है, वहां बीते रविवार को विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर भव्य आयोजन हुआ था। यहीं पर प्रदेश के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने एक बड़ा बयान दे दिया था। उन्होंने कह दिया था कि मेरे लिए मंत्री पद कोई मायने नहीं रखता, इसे तो मैं कभी भी छोड़ सकता हूं। ये बयान अब प्रदेश की सियासी सरगर्मी बढ़ा रहा है।
मीणा हाईकोर्ट में किरोड़ी का बयान
मीणा हाईकोर्ट में किरोड़ी लाल मीणा का सीधा संदेश था कि उनके लिए जनता का हक़, आदिवासी समाज की अस्मिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई सबसे पहले है-मंत्री पद तो उनके लिए जनता की सेवा का महज़ एक जरिया है। लेकिन अब सियासी गलियारों में इसको लेकर सुगबुगाहट तो तेज़ हो ही गई है कि क्या किरोड़ी लाल मीणा बीजेपी से खुश नहीं है, हालांकि किरोड़ी लाल मीणा विधानसभा में ये बयान दे चुके हैं। अंतिम सांस तक बीजेपी के साथ रहूंगा और ताबूत में आखिरी कील भी मैं ही गाड़ूंगा।
'जब तक जिंदा हूं तब तक आदिवासियों के आरक्षण को छू नहीं सकता कोई'
वहीं देश भर में आरक्षण को लेकर चल रही तरह-तरह की अटकलों और अफवाहों पर पूर्णविराम लगाते हुए डॉ. किरोड़ी ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक किरोड़ी के शरीर में जान है, दुनिया की कोई ताक़त आदिवासियों के आरक्षण को छू भी नहीं सकती।
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