Lawrence Bishnoi: क्या जेल से भागने का था प्लान? लॉरेंस बिश्नोई के भांजे ने अजमेर जेल में क्यों की भूख हड़ताल?

अजमेर की घूघरा स्थित हाई सिक्योरिटी जेल में बंद सचिन थापन उर्फ सचिन बिश्नोई की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे 21 अक्टूबर 2026 को जवाहरलाल नेहरू (जेएलएन) अस्पताल में भर्ती कराया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह करीब 17–18 दिनों से खाना नहीं खा रहा था। अस्पताल के अधिकारियों ने उसकी हालत बिगड़ने और इलाज कराने से इनकार करने की जानकारी दी, जबकि जेल प्रशासन ने उसके मौन व्रत और बैरक में दो साथियों को रखने की मांग का हवाला दिया है।
सचिन थापन की भूख हड़ताल के पीछे क्या है वजह?
सचिन थापन के भूख हड़ताल पर जाने की वजह को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में अलग जानकारी सामने आई है। जेल प्रशासन के बयान के मुताबिक, उसने अपने दो साथियों को उसी बैरक में रखने की मांग मौखिक रूप से की थी। हालांकि, उसने इस संबंध में कोई लिखित आवेदन नहीं दिया था।
जेल अधीक्षक के मुताबिक जिन दो कैदियों को सचिन अपने साथ रखना चाहता था, उन पर बैरक में लगे सीसीटीवी कैमरे और टाइल्स तोड़ने के आरोप हैं। इस घटना के बाद उनके खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज कराया गया था। जेल प्रशासन का कहना है कि अनुशासनहीनता के आरोपों का सामना कर रहे कैदियों को एक ही बैरक में रखना जेल नियमों के अनुरूप नहीं है।
दूसरी तरफ, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में जेल की STD फोन सुविधा बंद होने को भी सचिन की भूख हड़ताल की वजह बताया गया है।
JLN अस्पताल में भर्ती, इलाज कराने से भी इनकार
21 अक्टूबर को तबीयत बिगड़ने के बाद सचिन थापन को कड़ी सुरक्षा के बीच अजमेर के जेएलएन अस्पताल लाया गया। अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अमित यादव के मुताबिक, लंबे समय तक भोजन नहीं करने के कारण उसकी हालत बिगड़ी थी।
कौन है सचिन थापन उर्फ सचिन बिश्नोई?
सचिन थापन को सचिन बिश्नोई के नाम से भी जाना जाता है। वह गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का भांजा बताया जाता है और पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में आरोपी है।
पुलिस जांच के मुताबिक, मूसेवाला की हत्या से पहले रेकी करने और शूटरों को हथियारों सहित जरूरी मदद मुहैया कराने में उसकी कथित भूमिका रही थी। वो फर्जी पासपोर्ट के जरिए भारत से बाहर चला गया था और 1 अगस्त 2023 को अजरबैजान से प्रत्यर्पण के बाद भारत लाया गया था। इसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में है। ऐसे में सवाल ये है कि आखिर ये छिप-छिप कर भूख हड़ताल की किसलिए थी...क्या ये जेल से बाहर निकलने का जुगाड़ था...या फिर कुछ और कहानी इसके पीछे है...
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