पाकिस्तान पर बयान के बाद मदन राठौड़ का फूटा सोशल मीडिया पर गुस्सा, बोले- बने सख्त कानून

Jaipur: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बीते दिनों पाकिस्तान को लेकर एक बयान दिया था। जिसके बाद अब उनका गुस्सा सोशल मीडिया पर फूट पड़ा। उन्होंने कह दिया कि फेक वीडियो और सोशल मीडिया पर झूठा नैरेटिव फैलाने वालों पर सख्त कानून बनाकर कार्रवाई करनी चाहिए। मदन राठौड़ ने ऐसे लोगों के खिलाफ कड़े कानून बनाने की जरूरत बताई है, जो वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं और उसके जरिए किसी व्यक्ति की छवि खराब करने या समाज में भ्रम फैलाने का काम करते हैं।
फेक वीडियो और गलत नैरेटिव पर सख्त कानून की पैरवी
मदन राठौड़ का कहना है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी व्यक्ति के बयान या वीडियो को एडिट करके अलग अर्थ में पेश किया जा सकता है। ऐसे कंटेंट के जरिए लोगों के बीच गलतफहमी पैदा की जा सकती है और किसी की सामाजिक या राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
राठौड़ का ये बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान को लेकर उनकी टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। उनके बयान की एक छोटी क्लिप वायरल होने के बाद विपक्षी नेताओं ने भी उन्हें घेरा था। इसके बाद राठौड़ ने सफाई देते हुए दावा किया था कि उनकी बात को संदर्भ से काटकर पेश किया गया और वो भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के संदर्भ में बोल रहे थे।
पाकिस्तान बयान से शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, 15 अक्टूबर को जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मदन राठौड़ का पाकिस्तान को लेकर दिया गया बयान वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में वह अमेरिका और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति बनने पर पाकिस्तान के साथ खड़े होने की बात कहते सुनाई दिए थे। इस बयान को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष पर निशाना साधा था।
विवाद बढ़ने के बाद राठौड़ ने सफाई देते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी युद्ध को लेकर नहीं, बल्कि क्रिकेट मैच के संदर्भ में थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके भाषण के कुछ सेकंड का वीडियो काटकर वायरल किया गया, जिससे उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फेक वीडियो, भ्रामक सूचनाओं और डिजिटल कंटेंट की विश्वसनीयता को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि, इस मुद्दे पर एक बड़ा सवाल यह भी है कि फेक वीडियो और जानबूझकर फैलाए गए गलत नैरेटिव पर कार्रवाई कैसे तय होगी? कानून बनाते समय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जानबूझकर फैलाए गए दुष्प्रचार के बीच अंतर करना भी जरूरी होगा।
पहले भी सोशल मीडिया पर कानून की मांग उठा चुके हैं राठौड़
ये पहली बार नहीं है जब मदन राठौड़ ने सोशल मीडिया को लेकर सख्त कानून बनाने की पैरवी की है। इससे पहले भी उन्होंने राज्यसभा में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक रील्स और कंटेंट को लेकर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने और ऐसे कंटेंट पर निगरानी की मांग की थी।
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