JJM घोटाले में महेश जोशी का करीबी गिरफ्तार, घोटाले में सबसे बड़ा हाथ

JJM Scam Mahesh Joshi: करीब 900 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी के करीबी संजय बड़ाया को रविवार देर रात दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया। ACB के मुताबिक, इमीग्रेशन से सूचना मिलने के बाद रात करीब 2 बजे बड़ाया को हिरासत में लिया गया। उस पर पहले से ही लुकआउट नोटिस जारी था।
JJM घोटाले में सबसे बड़ा हाथ संजय बड़ाया का सबसे बड़ा हाथ
गिरफ्तारी के वक्त संजय थाईलैंड में एक शादी कार्यक्रम में हिस्सा लेकर लौटा था। जांच एजेंसियों का दावा है कि बड़ाया इस घोटाले में बिचौलिये की भूमिका में था और उसे ‘मास्टरमाइंड’ माना जा रहा है। आरोप है कि वह ठेकों में अनियमितताओं, धन के लेन-देन और ट्रांसफर-पोस्टिंग तक में एक्टिव था।
जांच अधिकारियों ने बताया कि कि बड़ाया केवल पूर्व मंत्री जोशी का ही नहीं, बल्कि रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल का भी बेहद करीबी है। अग्रवाल को ACB पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और वे इस समय जेल में हैं।
थाईलैंड से लौटते ही गिरफ्तारी
थाईलैंड में शादी समारोह में शामिल होकर लौटे बड़ाया को जैसे ही दिल्ली एयरपोर्ट पर इमीग्रेशन जांच से गुजरना था, सूचना तुरंत ACB को भेजी गई। टीम ने एयरपोर्ट पर ही उसे गिरफ्तार किया और राजस्थान लाने की प्रक्रिया शुरू की थी। ACB के मुताबिक इस मामले में अभी भी तीन आरोपी फरार हैं।
नौकरी से करोड़पति बनने तक की कहानी
दस्तावेजों से पता चला है कि बड़ाया साल 2022 तक एक इंश्योरेंस कंपनी में मात्र 7 लाख रुपए सालाना वेतन पर नौकरी करता था। लेकिन JJM घोटाले की अवधि में उसकी संपत्ति तेजी से बढ़ी और वो करोड़पति बन गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की, की गई पिछली जांच में उसने ‘मैसर्स चमत्कारेश्वर बिल्डर्स एंड डेवलपर’ नाम से कंपनी बनाई थी, जिसमें उसकी पत्नी नैना बड़ाया पार्टनर थीं। इस कंपनी के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन और JDA की जमीनों पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जे के कोशिश सामने आए थे।
महेश जोशी की रिमांड आज खत्म, कोर्ट में पेशी
पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को ACB ने 7 मई को गिरफ्तार किया था। अदालत ने उन्हें 11 मई तक रिमांड पर भेजा था। रिमांड का टाइम आज पूरा हो रहा है। अब जोशी को ACB कोर्ट में पेश किया जाएगा। ACB की प्राइमरी चार्जशीट के मुताबिक, अगर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप साबित होते हैं, तो महेश जोशी, सुबोध अग्रवाल और दूसरे आरोपियों को 10 साल तक की सज़ा हो सकती है।
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