नागौर की खदान से CM भजनलाल ने चला ऐसा दांव, क्या हनुमान बेनीवाल कहेंगे शुक्रिया?

राजस्थान की सियासत में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के बीच सियासी टकराव किसी से छिपा नहीं है। लेकिन अब नागौर की एक खदान को दोबारा शुरू करने के निर्देश ने ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब सियासत के गलियारों में तलाशा जा रहा है। वो ये कि नागौर की लिग्नाइट माइंस शुरू होने से अगर हजारों लोगों के रोजगार और भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग को राहत मिलती है, तो क्या हनुमान बेनीवाल अपने धुर विरोधी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को धन्यवाद देंगे?
दरअसल, नागौर में राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड यानी RSMML की लिग्नाइट माइंस करीब 4 साल से बंद पड़ी हैं। नीलामी की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद जरूरी दस्तावेजों और पर्यावरण-प्रशासनिक परमिशन में देरी के चलते इनका संचालन अटक गया।
इसका असर सिर्फ नागौर तक सीमित नहीं रहा। देश के प्रमुख टेक्सटाइल हब भीलवाड़ा का कपड़ा प्रोसेस उद्योग भी ईंधन की बढ़ती कीमतों और उसकी कमी से जूझ रहा है। स्थानीय लिग्नाइट की आपूर्ति रुकने से बाजार में दूसरे ईंधन विकल्पों पर निर्भरता बढ़ी जिससे उत्पादन लागत पर भी दबाव पड़ने लगा।
ऐसे में लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार से दखल की मांग की। इसके बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नागौर की लिग्नाइट माइंस को तत्काल प्रभाव से दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार के इस कदम से कपड़ा उद्योग को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। हालांकि, माइंस में असल उत्पादन और नियमित आपूर्ति कब शुरू होती है, ये देखना अभी बाकी है। लेकिन अब इस पूरे मामले का सियासी पहलू भी दिलचस्प है। दरअसल सांसद हनुमान बेनीवाल लगातार प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरते रहे हैं। ऐसे में नागौर की खदानों को शुरू करने का फैसला उनके संसदीय क्षेत्र के लिए अहम माना जा सकता है।
अब सवाल ये है कि क्या बेनीवाल इस फैसले का स्वागत करेंगे? क्या मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के इस कदम की तारीफ करेंगे? या फिर इसे सरकार की जिम्मेदारी बताते हुए दूसरे मुद्दों पर अपना हमला जारी रखेंगे?
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