पांचना बांध पर अब आगे क्या होगा? किरोड़ी की सहमति देने के बाद क्या 6 दिन में खुल जाएगा पानी?

राजस्थान के पूर्वी हिस्से में करीब दो दशक से चला आ रहा पांचना बांध जल विवाद आखिरकार सुलझ गया है। बीती देर रात दो दौर की वार्ता में प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच हुई अहम बैठक में सर्वसम्मति से समाधान निकल आया। समझौते के तहत अब अगले 7 दिनों के भीतर पांचना बांध से सिंचाई नहरों में पानी छोड़ा जाएगा, जिससे लंबे समय से पानी की मांग कर रहे कमांड एरिया के किसानों को राहत मिलेगी।
क्या था 20 साल पुराना विवाद?
करौली जिले का पांचना बांध पूर्वी राजस्थान का सबसे बड़ा मिट्टी का बांध माना जाता है। वर्ष 2006 के बाद से बांध के पानी के बंटवारे को लेकर विवाद लगातार गहराता गया। एक ओर डूब क्षेत्र (Submergence Area) के गांवों के लोग (गुर्जर बहुल) बांध के पानी पर पहला अधिकार होने का दावा करते रहे, क्योंकि उनकी जमीन बांध निर्माण में डूब गई थी। दूसरी तरफ कमांड एरिया के किसान (मीणा और OBC बहुल) नहरों में सिंचाई के लिए नियमित पानी छोड़ने की मांग कर रहे थे। इसी विवाद के चलते सालों से नहरों में पानी का नियमित प्रवाह बंद था।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बनी सहमति
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़ने के आदेश का पालन करने को कहा था। अदालत ने आदेशों की अनदेखी पर नाराजगी जताते हुए 15 दिन के भीतर पानी छोड़ने के निर्देश दिए। साथ ही ये भी कहा कि अगर इतने दिनों में पानी नहीं छोड़ा गया तो कलेक्टर खुद आकर इसका जवाब कोर्ट के देंगे।
क्या हुआ समझौता?
कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा, जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म की बैठक में तय हुआ कि
-7 दिन के भीतर नहरों में पानी छोड़ा जाएगा।
-डूब क्षेत्र के गांवों की सिंचाई जरूरतों को भी प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा।
-पानी का वितरण प्रशासन की निगरानी में तय व्यवस्था के अनुसार होगा।
-भविष्य में जल बंटवारे को लेकर विवाद ना हो, इसके लिए स्थायी व्यवस्था तैयार की जाएगी।
पहली वार्ता में तो बीच में उठकर चले गए थे किरोड़ी
बीती शाम को जयपुर के शिक्षा संकुल में हुई इस हाईलेवल मीटिंग में पहले दौर की वार्ता में इतनी ज्यादा पेचीदगियां हो गई कि कोई सहमति ही नहीं बन पाई पानी छोड़ने को लेकर। इस दौरान कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा बैठक के बीच में ही उठकर बाहर चले गए थे।
इसके बाद देर रात को फिर से मीटिंग में हुई जिसमें किरोड़ी भी शामिल हुए। काफी देर बाद बैठक के बाद उन्होंने मीडिया को बताया कि सहमति बन गई है। 7 दिन में पानी छोड़ दिया जाएगा।
किरोड़ी के अचानक मीटिंग छोड़कर जाने के सवाल पर सुरेश रावत ने कहा कि उन्हें बीच में कोई काम आ गया था इसलिए बाहर चले गए थे।
किन किसानों को मिलेगा फायदा?
पानी छोड़े जाने से सवाई माधोपुर और करौली के कमांड एरिया के हजारों किसानों को राहत मिलेगी। लंबे समय से सिंचाई के लिए नहरों में पानी नहीं पहुंचने के कारण खेती प्रभावित हो रही थी। सरकार का मानना है कि इससे हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई मिल सकेगी और खरीफ सीजन की फसल को फायदा होगा।
पहले क्या थी स्थिति?
पिछले कुछ दिनों से विवाद इतना बढ़ गया था कि एक तरफ 39 गांवों के लोग बांध से पानी छोड़ने का विरोध कर रहे थे, जबकि दूसरी तरफ 35 गांवों के किसान पानी छोड़ने की मांग को लेकर खंडीप गांव में महापंचायत कर रहे थे। दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे और प्रशासन के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई थी। तब महापंचायत में जाकर किरोड़ी लालमीणा ने स्थिति संभाली और पांचना बांध पर गुर्जर समुदाय के पास जाकर गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने बातचीत की।
सरकार ने क्या कहा?
सरकार का कहना है कि सभी पक्षों की सहमति से समाधान निकाला गया है। प्रशासन अब तय समयसीमा के भीतर नहरों में पानी छोड़ने की प्रक्रिया शुरू करेगा। साथ ही भविष्य में जल प्रबंधन को लेकर स्थायी और पारदर्शी व्यवस्था विकसित करने पर भी काम किया जाएगा।
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