खाद-बीज माफिया पर सबसे बड़ा प्रहार, क्या इसीलिए विपक्ष के निशाने पर कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा

Kirodi Lal Meena: राजस्थान की राजनीति में इन दिनों एक सवाल तेजी से चर्चा में है। राजस्थान राज्य बीज निगम के डायरेक्टर जुगल किशोर बिश्नोई 2 करोड़ 43 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए ट्रैप होते हैं। इसके बाद कांग्रेस सीधे कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पर निशाना साधती है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा राजनीतिक हमले किरोड़ी लाल मीणा पर ही क्यों हो रहे हैं? क्या इसकी वजह सिर्फ ये ट्रैप है, या फिर इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक कहानी भी छिपी हुई है?
रिश्वत लेते ट्रैप राज्य बीज निगम के डायरेक्टर
राजस्थान राज्य बीज निगम के डायरेक्टर जुगल किशोर बिश्नोई को कथित तौर पर 2 करोड़ 43 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया जाता है। मामला सामने आते ही विपक्ष सरकार पर हमलावर हो जाता है। कांग्रेस आरोप लगाती है कि बिश्नोई कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के करीबी हैं और विभाग में जो कुछ भी हुआ, उसकी नैतिक जिम्मेदारी मंत्री की भी बनती है। लेकिन यहीं से शुरू होती है इस मामले की दूसरी कहानी।
क्योंकि अगर हम पिछले ढाई वर्षों का रिकॉर्ड देखें, तो कृषि विभाग में कुछ ऐसे अभियान भी चले हैं जिन्होंने खाद-बीज कारोबार से जुड़े बड़े नेटवर्कों को सीधे चुनौती दी है। यही वो तथ्य हैं जिनका जिक्र किरोड़ी लाल मीणा के समर्थक लगातार कर रहे हैं।
एक साल में किरोड़ी लाल मीणा ने की ये कार्रवाई
कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने खाद-बीज माफियाओं पर जो कार्रवाई की हैं। उसकी लिस्ट काफी लंबी चौड़ी है। 1 अप्रैल 2025 से 05 जून 2026 तक खाद, बीज और कीटनाशक दुकानों पर कृषि के गुण नियंत्रण विभाग ने कुल 113 FIR दर्ज की है। 158 जप्ती, 11,938 निरीक्षक, 765 कारण बताओ नोटिस, 169 लाईसेन्स सस्पेंड, 46 लाइसेन्स कैंसिल, 28 केस में पुलिस ने गिरफ्तारी की, 16 केसों में कोर्ट में चालान पेश है, 21 केसों में कोर्ट में अग्रिम जमानत, 27 उर्वरक निर्माण सील, 35400 बैग यूरिया बैंग के जब्त, 2.25 लाख उर्वरक बैग जब्त, 3 FIR प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में गड़बड़ी करने पर, एक गिरफ्तार, नकली बायोफ्यूल में एक FIR दर्ज हुई है।
गृह सचिव के ACS, DGP राजस्थान तक को लिखा लेटर
आरोपियों पर कार्रवाई के लिए कृषि मंत्री ने 12 दिसम्बर 2025 को अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह विभाग और DGP राजस्थान को एक लेटर भी लिखा। जिसमें साफ-साफ ये कहा गया था कि संबंधित मामलों में FIR दर्ज की है। लेकिन अब तक इन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में कृषि विभाग ने नकली खाद, फर्जी बीज और किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वाले नेटवर्कों के खिलाफ तगड़ी कार्रवाई की है।
इतनी तगड़ी कार्रवाई, इसीलिए हो निशाने पर किरोड़ी?
राजस्थान के कृषि विभाग में इतने बड़े स्तर पर कार्रवाई बहुत कम देखने को मिली है। सियासी जानकार कह रहे हैं कि जब करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार पर चोट पड़ती है तो उससे प्रभावित समूह भी सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में यहीं से राजनीति का सबसे बड़ा सवाल निकलकर सामने आता है कि क्या खाद-बीज कारोबार से जुड़े प्रभावशाली हित समूहों को इन कार्रवाइयों से नुकसान पहुंचा। अगर ऐसा हुआ, तो क्या उसी का राजनीतिक असर आज दिखाई दे रहा है।
यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक ट्रैप केस के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे राजस्थान की सियासत के बड़े समीकरणों से भी जोड़कर देखा जा रहा है कि क्या डॉ. किरोड़ी लाल मीणा सिर्फ इसलिए विपक्ष के निशाने पर हैं क्योंकि उन्होंने खाद-बीज माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की।
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