भजनलाल सरकार ने घटाई RLP प्रमुख हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा, क्या ये मूर्खाधिराज कांड का नतीजा?

प्रदेश की भजनलाल सरकार ने एक बड़ा झटका देते हुए RLP सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा से जयपुर कमिश्नरेट के 3 PSO रातों-रात हटा दिए हैं। इस 'सिक्योरिटी कट' ने गुलाबी नगरी से लेकर नागौर तक खलबली मचा दी है। अब गलियारों में चर्चा तेज़ है कि क्या ये सिर्फ एक रूटीन एडमिनिस्ट्रेटिव कदम है, या फिर बेनीवाल के हालिया 'जयपुर कूच' और सरकार विरोधी तेवरों का सीधा साइड इफेक्ट?
मैंने कभी नहीं मांगी सुरक्षा
सुरक्षा कम होते ही हनुमान बेनीवाल ने सरकार पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने साफ लहजे में कहा—"मैंने कभी सरकार से सुरक्षा मांगी ही नहीं थी। मेरी रक्षा के लिए तो राजस्थान के हजारों युवा ही काफी हैं।" बेनीवाल का दावा है कि जब सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा विवाद के दौरान उन्होंने आंदोलन किया था, तब इंटेलिजेंस ने खुद उनकी जान को खतरा बताते हुए जयपुर से AK-47 से लैस कमांडो और नागौर से पुलिस जवान समेत कुल 8 सुरक्षाकर्मी तैनात किए थे। अब जब सरकार ने जयपुर के जवानों को हटा दिया है, तो बेनीवाल सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किस आधार पर सुरक्षा दी गई थी और अब किस आधार पर हटाई गई है? उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि सरकार जयपुर में तनाव पैदा करना चाहती थी, लेकिन उन्होंने संयम बरतकर माहौल बिगड़ने से बचा लिया।
गौर करें तो हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा का विवाद नया नहीं है। इनकी सिक्योरिटी हमेशा से सुर्खियों में रही है।
साल 2019-2020 में गैंगस्टर से मिली धमकी
लॉरेंस बिश्नोई और आनंदपाल गैंग के गुर्गों से खतरे और काफिले पर हुए हमलों के बाद हनुमान बेनीवाल को केंद्र और राज्य के तालमेल से 'Y-Plus' कैटेगरी की सुरक्षा दी गई थी। वहीं सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या के बाद जब बेनीवाल को विदेशी नंबरों से धमकियां मिलीं, तो इंटेलिजेंस इनपुट पर उनके जयपुर और नागौर आवास पर अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैनात की गई। इसके अलावा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने जब थ्रेट असेसमेंट के बाद इनकी सुरक्षा घटाई थी, तब भी बेनीवाल ने इसे 'राजनीतिक द्वेष' बताया था। उनका कहना था कि पेपर लीक और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है।
हनुमान बेनीवाल राजस्थान की राजनीति के वो नेता हैं जो बजरी माफिया, पेपर लीक माफिया और सीधे सरकारों से टकराने के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि उनकी सुरक्षा का मुद्दा हमेशा गरमाया रहता है। सरकार इसे भले ही रूटीन रिव्यू प्रक्रिया बता रही हो, लेकिन हाल ही भैराणा धाम में संतों की महापंचायत के दौरान बेनीवाल के 'जयपुर कूच', CM भजनलाल शर्मा को मूर्ख कहना और कड़े तेवरों को देखते हुए राजनीतिक पंडित इसे सरकार की तरफ से एक 'मैसेज' के रूप में देख रहे हैं।
फिलहाल अब बेनीवाल के साथ सिर्फ उनके गृह क्षेत्र नागौर के कॉन्स्टेबल ही तैनात रहेंगे, बाकी सुरक्षा का जिम्मा उनके समर्थकों और निजी गार्ड्स के भरोसे है।
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