ना Ex MLA, ना प्रचारक...राजस्थान में कोई सुरक्षित नहीं, 10 दिन में 8 वारदात

राजस्थान में बीजेपी के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या से पूरे बेलगाम अपराध पर तो गुस्सा फूट ही रहा है जनता का, लेकिन पुलिसिया तंत्र पर भी सवालिया निशान पैदा हो रहे हैं। ये जानकर गुस्सा आता है और हैरानी भी होती है कि मात्र 10 दिनों में 8 गंभीर वारदातें सामने आ चुकी हैं राजस्थान में, जिसने लोगों में डर का माहौल बना दिया है। अतर सिंह की हत्या के बाद तो ये लगने लगा है कि अब आम शख्स ही नहीं बल्कि बड़े नेता तक की जिंदगी सुरक्षित नहीं बची। आखिर इसका जवाब कौन देगा? सवाल है कि आखिर राजस्थान में हो क्या रहा है? क्या अपराधियों के मन से कानून और पुलिस का खौफ खत्म होता जा रहा है?
यहां हम आपको राजस्थान में अपराध की वो कहानियां बता रहे हैं- जिन्होंने महज 10 दिनों में राजस्थान को अपराध का स्थान बना दिया। पहली घटना ज्यादा पुरानी नहीं बल्कि अभी कुछ दिन पहले की ही है। जब राजधानी जयपुर में एक 19 साल के युवक की अस्पताल में मौत हो जाती है। आरोप लगा कि पुलिस कस्टडी में थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया गया वो भी बिना किसी केस दर्ज किए। तो ये हालात हैं, जयपुर के पुलिसिया तंत्र के।
दूसरा मामला जो कल का ही है। जयपुर ग्रामीण के ही दूदू के नरैना थाने में RSS जिला प्रचारक के साथ पुलिसकर्मियों ने बेरहमी से मारपीट ने भी पुलिस के रवैये पर सवाल खड़े किए हैं।
तीसरी घटना टोंक की है...जहां दूध बेचने जा रहे राजू लाल गुर्जर की हत्या कर उनके सोने के कुंडल लूट लिए गए। मामले में दो नाबालिगों को हिरासत में लेने की जानकारी सामने आई।
चौथी घटना सीकर की....जहां तीन दिन पहले ही गैंगवार में SP गैंग के मुखिया की हत्या कर दी गई। चित्तौड़गढ़ के हट्टीपुरा गांव में 65 वर्षीय विधवा जमना बाई की हत्या का मामला सामने आया। उनके गहने गायब मिलने के बाद पुलिस लूट के एंगल से भी जांच कर रही है।
जयपुर में ही एक फार्मा कंपनी के मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव को बाइक से टक्कर मारकर गिराया गया और फिर डंडों-सरियों से हमला कर उसका बैग और मोबाइल लूट लिया गया।
उधर, अजमेर में पार्किंग विवाद इतना बढ़ा कि एक युवक पर चाकू से हमला कर दिया गया। मामले में आरोपी पुलिस हिरासत में है।
अब इन तमाम घटनाओं को एक साथ रखकर देखिए- हत्या, लूट, हिंसा और पुलिस की कार्यशैली पर उठते सवाल। तो आखिर आम आदमी खुद को सुरक्षित महसूस करे तो करे कैसे? राजस्थान की जनता को आश्वासन नहीं, सुरक्षा चाहिए। सवाल सीधा है कि क्या पुलिस अपराधियों में कानून का खौफ पैदा कर पाएगी, या प्रदेश में ऐसी वारदातों का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा?
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