बीजेपी की नई युवा मोर्चा की टीम में क्रिमिनल बैकग्राऊंड और भर-भरकर परिवारवाद, जानें किस-किसको मिली जिम्मेदारी

Jaipur: भारतीय जनता युवा मोर्चा की नई कार्यकारिणी का ऐलान तो बीती रात हो गया लेकिन नई सुबह एक विवाद के साथ हुई। विवाद इस बात का कि इस लिस्ट में कई ऐसे नाम हैं, जो क्रिमिनल बैकग्राऊंड के हैं, जो परिवारवाद को आगे बढ़ा रहे हैं, यानी कई सियासी नेताओं के बेटे हैं उनके संबंधी हैं।
मुख्य टीम में महिला पदाधिकारी ही नहीं
नई कार्यकारिणी टीम की मुख्य संरचना में एक भी महिला को जगह नहीं मिली है। जिससे विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों ने बीजेपी की महिला सशक्तिकरण नीति पर सवाल उठाए हैं। महिलाओं को केवल सहायक भूमिकाओं—
निकिता शेखावत (प्रशिक्षण प्रभारी),
ट्विंकल शर्मा (सह-प्रशिक्षण प्रभारी) और
वृंदा राठौड़ (प्रवक्ता) जैसी जिम्मेदारियाँ दी गई हैं।
सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक यह सवाल गूंज रहा है कि जब केंद्र और राज्य स्तर पर भाजपा “नारी शक्ति वंदन” की नीति पर जोर देती है, तो युवा मोर्चा की मुख्य टीम में महिलाओं की भागीदारी क्यों सीमित है।
BJYM प्रदेश अध्यक्ष शंकर गोरा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सूची "सभी के सुझावों" के आधार पर तैयार की गई है और आगामी कार्यसमिति और जिला अध्यक्षों की नियुक्तियों में महिलाओं की संख्या बढ़ाई जाएगी।
बीके कुशवाह की नियुक्ति पर तीखी बहस
बीजेपी की इस लिस्ट में सबसे विवादित नियुक्ति बीके कुशवाह को प्रदेश मंत्री बनाए जाने को लेकर है। साल 2022 में वे देशी कट्टा और कारतूस के साथ गिरफ्तार हो चुके हैं। हाल ही में उनका पत्थरबाज़ी का वीडियो वायरल होने के बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज हुई थी। दिसंबर 2025 में उन्हें पार्टी में शामिल करवाते हुए वरिष्ठ पदाधिकारी भूपेंद्र सैनी और अपूर्वा सिंह पाठक ने दुपट्टा पहनाकर सदस्यता दिलाई थी। अब उन्हें भाजयुमो में जिम्मेदारी दी गई है।
इस पर शंकर गोरा ने कहा कि सभी पदाधिकारियों के प्रोफाइल की जांच हुई है और अगर किसी पर गंभीर रिकॉर्ड मिला, तो पार्टी कार्रवाई करेगी।
सियासी रसूख वालों के बेटों को जिम्मेदारियां
नई टीम में राजनीतिक परिवारों से जुड़े कई युवा नेताओं को बड़ी भूमिकाएँ मिली हैं, जैसे दिव्यांश भारद्वाज, जिन्हें प्रदेश मंत्री बनाया गया है, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पूर्व OSD महेंद्र भारद्वाज के बेटे हैं। आदित्य सिंघानिया, जो भाजपा नेता और सीकर के पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज सिंहानिया के बेटे हैं, प्रदेश मंत्री बनाए गए हैं।
शिवराज सिंह, प्रभावशाली नेता भंवर सिंह पलाड़ा के बेटे, को प्रदेश उपाध्यक्ष पद मिला है। उनकी मां सुशील कंवर मसूदा विधायक रह चुकी हैं।
इन नियुक्तियों के बाद संगठन में वंशवाद और राजनीतिक प्रभाव की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है। इसके अलावा लिस्ट में 90% पद नए चेहरों को मिले हैं, जिनमें से बड़ी संख्या ABVP और विश्वविद्यालय छात्र राजनीति से आने वाले कार्यकर्ताओं की है। कई ऐसे नाम जो संगठन में मजबूत पकड़ रखते थे, उन्हें मौका नहीं मिला—
श्याम सिंह रजावत (दो बार हरियाणा प्रांत संगठन मंत्री)
अर्जुन तिवारी (जयपुर प्रांत संगठन मंत्री)
रोशनी शर्मा (ABVP राष्ट्रीय कार्यकारिणी)
अमित कुमार बड़बड़वाल (लॉ यूनिवर्सिटी अध्यक्ष)
राकेश यादव (ABVP विभाग संयोजक)
इनके बाहर रह जाने से छात्र संगठनों के भीतर भी सवाल उठ रहे हैं कि युवा मोर्चा की नई टीम किस आधार पर चुनी गई है।
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