Rajasthan Nikay Chunav: मुस्लिम वोट और हनुमान बेनीवाल, कांग्रेस की लुटिया डूबना तय, बीजेपी की होगी बल्ले-बल्ले

Hanuman Beniwal RLP: राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकर शह और मात का खेल जारी है। बीजेपी और कांग्रेस के अलावा इस बार एक पार्टी और है जो पूरे प्रदेश में निकाय चुनाव लड़ रही है उसका नाम है आरएलपी। हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी इस बार पूरे प्रदेश में निकाय चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी है। इसके लिए बेनीवाल ने एक चुनाव प्रबंधन समिति का गठन किया है जिसमें दिलीप चौधरी, इंद्रा देवी बावरी और नारायण बेनीवाल समेत कई सीनियर नेताओं को शामिल किया है। आरएलपी प्रमुख और नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल पूरे जोर-शोर से चुनावी प्रचार में जुटे हैं। आज से नामाकंन की शुरुआत हो रही है ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि बेनीवाल भी अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर सकते हैं।
इस बीच कल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। यह वीडियो मुंडवा का है। जहां ईद के अवसर पर हनुमान बेनीवाल मुस्लिमों के बीच शहीद बाबा की दरगाह पर पहुंचे थे। जहां पर उन्होंने चादर भी चढ़ाई। इस दौरान उन्होंने मुस्लिमों को संबोधित भी किया। बेनीवाल ने कहा कि मैं अपने मुस्लिम भाइयों को भरोसा दिलाता हूं कि जब भी आपको मेरी जरूरत पड़ेगी, आपका यह भाई सबसे आगे खड़ा मिलेगा। संकट के समय बेनीवाल पीठ दिखाकर भागने वालों में से नहीं है।
जाटों का विकल्प तलाश रहे बेनीवाल
अब सवाल यह है कि क्या बेनीवाल राजनीति के लिए तुष्टिकरण की राजनीति पर उतर आए हैं। अब तक प्रदेश में यह हवा थी कि बेनीवाल की राजनीति के केंद्र में केवल जाट वोट बैंक हैं। लेकिन 2023 विधानसभा में केवल एक सीट जीतने वाले बेनीवाल अब अपनी उस पुरानी छवि से बाहर निकलने की मशक्कत कर रहे हैं। इसी क्रम में वे बुधवार को मुस्लिमों के बीच पहुंचे। इसके अलावा वे मंच से कई बार जाटों से कह चुके हैं कि मैं केवल आप लोगों के सहारे सांसद नहीं बना हूं। अगर मुझे मुस्लिमों ने वोट नहीं दिया होता तो मैं चुनाव नहीं जीत पाता। बात तो सही है लेकिन कितने मुस्लिम बेनीवाल के साथ हैं यह भी देखने वाली बात होगी।
बता दें कि नागौर समेत पूरे प्रदेश में मुस्लिम कांग्रेस को वोट करते आए हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जाटों को अधर में छोड़कर मुस्लिम वोट बैंक की नाव पर सवार हुए बेनीवाल को कितनी सफलता मिल पाएगी। नतीजा चाहे जो हो लेकिन फिलहाल जाट खुद को ठगा हुआ सा महसूस कर रहे हैं। वोटों के लिए बेनीवाल का मुस्लिमों की गोद में जाकर बैठना कितना ठीक है? क्योंकि वह तो पहले ही कांग्रेस के पक्ष में है। रही बात लोकसभा चुनाव की तो इस दौरान कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार नहीं उतारा था जिसका फायदा बेनीवाल को मिला और वह चुनाव जीत गए। लेकिन इस बार स्थिति अलग है इस बार कांग्रेस भी मैदान में है। ऐसे में कितने मुस्लिम आरएलपी को वोट देंगे ये भी देखने वाली बात होगी।
बेनीवाल बने वोट कटवा
अभी आरएलपी और कांग्रेस का गठबंधन भी नहीं हुआ है ऐसे में नागौर में इस बार मुकाबला काफी रोचक होने वाला है। हालांकि यहां पर बीजेपी को फायदा मिलता नजर आ रहा है। क्योंकि जाट लैंड में सभी जाट बेनीवाल को वोट नहीं करते हैं। जाट बीजेपी और कांग्रेस को भी वोट करते हैं इसके अलावा अन्य ओबीसी जातियां बीजेपी के पक्ष में हमेशा से लामबंद होती आई है। ब्राहाण और राजपूत परंपरागत तौर पर बीजेपी के पक्ष में रहते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि मुस्लिम वोट बैंक की नाव पर सवार हुए बेनीवाल अपने को कितना मजबूत कर पाएंगे ये आने वाला ही बताएगा लेकिन इतना तय है कि इसका फायदा बीजेपी को जरूर मिलेगा।
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