राजेंद्र राठौड़ के परिवार की साख, क्या रख पाएंगे बेटे पराक्रम और बहू कनिका सिंह राठौड़

Rajasthan Panchayat Elections: राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव के तीसरे चरण के नामांकन के बाद अब राजनीति की तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। चूरू जिला परिषद और अलग-अलग वार्डों में इस बार दोनों ही मुख्य पार्टियों- भाजपा और कांग्रेस में 'परिवारवाद' का बोलबाला साफ नजर आ रहा है। नेताओं ने अपने बेटों-बेटियों, बहुओं और रिश्तेदारों को चुनावी मैदान में उतार दिया है, जिससे राजनीतिक गर्माहट काफी बढ़ गई है।
इस चुनाव का सबसे चर्चित मुकाबला चूरू जिला परिषद के वार्ड नंबर 39 में देखने को मिल रहा है। यहां भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ को टिकट मिला है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने तारानगर के विधायक नरेंद्र बुडानिया के भाई केसरचंद को मैदान में उतारा है। यानी वार्ड 39 में अब राजेंद्र राठौड़ के बेटे और विधायक बुडानिया के भाई के बीच सीधी आमने-सामने की टक्कर होने जा रही है।
लेकिन राठौड़ परिवार की राजनीति यहीं तक सीमित नहीं है—चित्तौड़गढ़ के निर्दलीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या की पत्नी सुशीला कंवर को भाजपा ने जिला परिषद के वार्ड 16 से उम्मीदवार बनाया है, जबकि राजेंद्र राठौड़ की पुत्र-वधू कनिका सिंह वार्ड 23 से ही चुनाव लड़ रही हैं। परिवारवाद की ये तस्वीर सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती। अगरा छातनी के पूर्व विधायक गुटारी लाल की बेटी पूजा दुबेश को भाजपा ने वार्ड 22 से प्रत्याशी बनाया है, दूसरी तरफ, कांग्रेस ने भी पीछे ना रहते हुए विधायक बुडानिया की पत्नी कनक बुडानिया को वार्ड 17 से टिकट देकर मैदान में उतार दिया है।
इसके अलावा, सुजानगढ़ से पूर्व मंत्री खेमाराम मेघवाल के पुत्र ओमप्रकाश मेघवाल को भाजपा ने वार्ड 12 से उम्मीदवार बनाया है। दोनों ही बड़ी पार्टियों में पूर्व सांसद, विधायक और वरिष्ठ नेताओं के परिवारों को आगे किए जाने से आम कार्यकर्ताओं में अंदर ही अंदर नाराजगी भी देखने को मिल रही है। हालांकि, टिकट रोके जाने और सीटें छोड़ने के दांव-पेच के बीच अब देखना यह होगा कि जनता इस परिवारवाद को अपना आशीर्वाद देती है या फिर किसी नए चेहरे को मौका मिलेगा। इस चुनावी जंग पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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