राजस्थान पुलिस वेबसाइट हैक? 59 हजार ई-मेल का दावा, 70301 आईडी कार्ड भी हैक?

राजस्थान में पुलिस की वेबसाइट पर साइबर अटैक का अलर्ट आया है। सरकारी ई-मेल सिस्टम को लेकर ऐसा दावा किया गया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हैकर्स का दावा है कि हजारों ई-मेल अकाउंट और लाखों ई-मेल से जुड़ा डेटा उनके हाथ लगा है। मामला सामने आते ही FIR दर्ज हुई और जांच के लिए टीम जयपुर पहुंच गई। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या वाकई राजस्थान पुलिस का डेटा खतरे में है?
5,926 मेल और 70301 ID रिकॉर्ड भी हैक
दरअसल, राजस्थान पुलिस और राज्य सरकार के ई-मेल सिस्टम से जुड़े कथित डेटा लीक का मामला सामने आया है। हैकर्स ने 5,926 मेलबॉक्स, 86 लाख 30 हजार ई-मेल डेटा, 78 लाख 30 हजार से ज्यादा ई-मेल, 70301 पहचान रिकॉर्ड और 59 हजार 460 मोबाइल नंबर होने का दावा किया है। ये आंकड़े हैकर्स के दावे हैं। शुरुआती जांच में वेबसाइट हैक होने के पुख्ता सबूत नहीं मिलने की बात पुलिस अधिकारी ने कही है।
इस मामले में साइबर क्राइम के DIG शांतनु कुमार के मुताबिक, शुरुआती जांच में वेबसाइट हैक होने के सबूत नहीं मिले हैं। वहीं, DOIT के उप निदेशक, विश्लेषक सह प्रोग्रामर मुकेश गडोदिया ने साइबर थाने में FIR दर्ज कराई गई है।
FIR भी हो गई दर्ज
ये FIR आईटी एक्ट की धारा 43, 65, 66 और 66-सी के तहत दर्ज हुई है। अब जांच एजेंसियां ये पता लगाने में जुटी हैं कि डेटा चोरी हुआ भी है या नहीं, और अगर हुआ है तो उसका दायरा कितना बड़ा है।
इस पूरे मामले का असर आम लोगों पर भी दिखाई दे रहा है। सर्वर की जांच और मेंटेनेंस के चलते राजस्थान पुलिस की मुख्य वेबसाइट बंद बताई जा रही है। इसके चलते किराएदारों, घरेलू सहायकों और ड्राइवरों के सत्यापन के साथ-साथ गुमशुदगी जैसी ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल करने में लोगों को परेशानी हो रही है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, एप आधारित सेवाएं चल रही हैं।
उधर, सरकारी ई-मेल व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर भी ऑडिट कराया जा रहा है। रिपोर्ट में SBI में डेटा लीक के बाद CERT-In से सुरक्षा ऑडिट कराने की जानकारी दी गई है। CERT-In यानी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम, केंद्र सरकार की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसी है, जो साइबर हमलों से जुड़े मामलों में तकनीकी सहायता और बचाव संबंधी दिशा-निर्देश देती है। अब सबसे अहम सवाल ये है कि क्या सरकारी ई-मेल सिस्टम में सेंध लगी है, या हैकर्स का दावा महज डर फैलाने की कोशिश है? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिलेगा।
इस लिंक को शेयर करें

