होम/rajasthan/rajasthan-politics-ashok-gehlot-sachin-pilot-controversy

क्या राजस्थान एक बार फिर देखने को तैयार है गहलोत पायलट की अदावत...वार-पलटवार का शुरु हो चुका है दौर

क्या राजस्थान एक बार फिर देखने को तैयार है गहलोत पायलट की अदावत...वार-पलटवार का शुरु हो चुका है दौर
राजस्थान
11 Jun 2026, 11:07 am
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Sachin Pilot and Ashok Gehlot: राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर 'पायलट वर्सेस गहलोत' का हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हो चुका है। वैसे तो इन दोनों नेताओं की अदावत कोई नई नहीं है, लेकिन इस बार का टकराव इसलिए खास है क्योंकि एक तरफ से तीखे तीर चले हैं, तो दूसरी तरफ से 'संयम और संस्कारों' की ढाल इस्तेमाल की गई है। कल करौली में जो कुछ भी हुआ, उसने साफ कर दिया है कि राजस्थान कांग्रेस के अंदर की आग ठंडी होना तो दूर, अब एक नए मोड़ पर आ खड़ी हुई है।

गहलोत ने शुरू की बहस, पायलट अब बढ़ा रहे?

बात की शुरुआत हुई पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के एक बयान से, जिसने पूरी कांग्रेस में हलचल मचा दी। गहलोत ने मीडिया के सामने आकर सीधे सचिन पायलट पर निशाना साधा। उन्होंने साल 2020 की उस 'मानेसर बगावत' को फिर से हवा दे दी, जब पायलट कुछ विधायकों के साथ दिल्ली-मानेसर चले गए थे। गहलोत ने सीधा दावा किया की पायलट ने भाजपा के साथ मिलकर उनकी सरकार गिराने की पूरी साजिश रची थी। और बगावत करने वाले विधायकों को 10-10 करोड़ रुपये दिए गए थे।

करौली में पायलट ने गहलोत को दिया जवाब

अब सबको इंतजार था कि सचिन पायलट इस पर क्या बोलेंगे। करौली में अपने पिता स्वर्गीय राजेश पायलट की मूर्ति अनावरण के मौके पर जब पायलट मंच पर आए, तो उन्होंने वो किया जिसकी राजनीति में माहिर खिलाड़ी ही उम्मीद कर सकते हैं। उन्होंने अशोक गहलोत का नाम तक नहीं लिया, लेकिन अपने शब्दों से ऐसा घेरा कि बात दूर तक चली गई।

'आंख में आंख डालकर देखो'

पायलट ने बेहद शांत लहजे में कहा, "राजनीति में शब्दों का मोल बहुत बड़ा होता है। जो बात मुंह से निकल गई, वो वापस नहीं आती। आप सब जानते हैं कि मैं बहुत संभलकर बोलता हूं। बिना संयम और अनुशासन के राजनीति की लंबी रेस नहीं जीती जा सकती।" लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। पायलट ने आगे एक ऐसी लाइन कह दी जिसने सुर्खियां बटोर लीं। उन्होंने कहा, "अगर आंख में आंख डालकर देखोगे, तो खुद पता चल जाएगा कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ।“

रमेश मीणा बोले गहलोत का नार्को टेस्ट कराओ

यानी पायलट ने बिना किसी तीखे शब्द के, गहलोत के आरोपों को झूठा करार दे दिया। इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प बात ये है कि सचिन पायलट खुद तो फ्रंट फुट पर आकर मर्यादा की बात कर रहे थे, लेकिन उन्होंने अपने समर्थकों को पूरी छूट दे रखी थी। पायलट के करीबी और पूर्व मंत्री रमेश मीणा ने मंच से वो कह दिया, जो खुद पायलट कभी नहीं कहते। अशोक गहलोत का नार्को टेस्ट होना चाहिए, ताकि दुनिया को पता चले कि वो कितना झूठ बोलते हैं।

पैसे हमने नहीं, बल्कि खुद गहलोत ने निर्दलीयों को बांटे थे। रमेश मीणा ने तो यहां तक कह दिया कि राहुल गांधी को अब गहलोत को कंट्रोल में रखना चाहिए, नहीं तो वो राजस्थान में कांग्रेस का बेड़ा गर्क कर देंगे। जब-जब गहलोत CM बने, पार्टी चुनाव हारी।

अगर इस पूरी तस्वीर को समझें, तो यह लड़ाई सिर्फ दो नेताओं की नहीं, बल्कि अनुभव बनाम युवा जोश की है। 2018 से शुरू हुआ यह 'मनभेद' आज तक खत्म नहीं हुआ है। गहलोत जहां आज भी पायलट को 'पार्टी से बगावत करने वाला' साबित करने में जुटे हैं, वहीं पायलट खुद को एक गंभीर, सहनशील और भविष्य के नेता के रूप में पेश कर रहे हैं।


इस लिंक को शेयर करें

ads

लेटेस्ट खबरें

ads
© 2026 Bharat Raftar. All rights reserved. Powered By Zentek.