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5 लाख में खरीदा पेपर, ब्लूटूथ से कराई नकल, महिला सुपरवाइजर भर्ती परीक्षा में कैसे हुआ खुलासा

5 लाख में खरीदा पेपर, ब्लूटूथ से कराई नकल, महिला सुपरवाइजर भर्ती परीक्षा में कैसे हुआ खुलासा
राजस्थान
11 Oct 2026, 03:32 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

राजस्थान में सरकारी नौकरी पाने के लिए किसी ने दिन-रात मेहनत की तो किसी ने 5 लाख रुपये देकर पूरा प्रश्नपत्र ही खरीद लिया। जी हां, राजस्थान की महिला सुपरवाइजर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक और ब्लूटूथ से नकल कराने के मामले में SOG ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस केस में अब तक 14 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। लेकिन इस पूरे खेल में पेपर किसने खरीदा, किसे नकल करवाई और कैसे अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए उत्तर? चलिए, पूरी कहानी समझते हैं।

मनीष गिला को SOG ने किया गिरफ्तार

दरअसल राजस्थान SOG ने महिला सुपरवाइजर सीधी भर्ती परीक्षा-2018 में नकल कराने के मामले में मनीष गिला नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की उम्र 32 साल है और उसे बीकानेर के पीथरासर से गिरफ्तार किया गया।

पेपर खरीदने वाले ने अपनी रिश्तेदार को कराई नकल

SOG की जांच के मुताबिक, मनीष ने पेपर लीक गैंग के सदस्य पौरव कालेर से 5 लाख रुपये में प्रश्नपत्र खरीदा था। इसके बाद अपनी रिश्तेदार मंजू कुमारी बिश्नोई को ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए परीक्षा में नकल करवाई थी। मंजू को इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, पेपर लीक करने वाली गैंग ने सबसे पहले प्रश्नपत्र हासिल किया। इसके बाद गैंग के सदस्यों ने पेपर सॉल्व किया और फिर परीक्षा में बैठे अभ्यर्थियों तक ब्लूटूथ डिवाइस के जरिए उत्तर पहुंचाए गए। यानी परीक्षा केंद्र के भीतर बैठा अभ्यर्थी डिवाइस की मदद से सवालों के जवाब हासिल कर सकता था।

2019 में हुआ था ये पेपर

ADG एसओजी विशाल बंसल के मुताबिक, 6 जनवरी 2019 को आयोजित महिला सुपरवाइजर भर्ती परीक्षा में संगठित गैंग ने धांधली की थी। इस मामले में SOG जयपुर में मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।

इस केस में अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें पेपर लीक करने वाली कालेर गैंग के 8 सदस्य और 6 महिला अभ्यर्थी शामिल हैं। जांच एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों और पेपर के जरिए फायदा उठाने वाले अभ्यर्थियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।

ऐसे में सवाल ये है कि आखिर सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में पेपर लीक का ये नेटवर्क कब पूरी तरह खत्म होगा? मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को कब ऐसा सिस्टम मिलेगा, जहां चयन उनकी काबिलियत से हो, ना कि लाखों रुपये देकर खरीदे गए पेपर से।


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