RCA विवाद: पूर्व कन्वीनर दीनदयाल कुमावत भूमाफिया, उन्होंने किया करोड़ों का घोटाला, आशीष तिवारी किया बड़ा खुलासा

जयपुर। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) में चल रहा विवाद एक बार फिर गहरा गया है। RCA की एडहॉक कमेटी के सदस्य आशीष तिवारी ने पूर्व कन्वीनर दीनदयाल (डीडी) कुमावत पर भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। भारत रफ्तार को दिए इंटरव्यू के दौरान आशीष तिवारी ने कहा कि दीनदयाल कुमावत खुद एक "भूमाफिया" की भूमिका में हैं और उनके पास कुमावत के खिलाफ घोटालों के पुख्ता दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं।
RCA को 'वंशानुगत' बनाने की कोशिश का आरोप
आशीष तिवारी ने देवस्थान विभाग में दिए गए एक आवेदन का हवाला देते हुए सनसनीखेज आरोप लगाया कि डीडी कुमावत आरसीए की संपत्तियों को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे थे । तिवारी ने कहा, "दीनदयाल कुमावत ने देवस्थान विभाग में एक एप्लीकेशन दी थी, जिसमें उन्होंने स्वयं को आरसीए का मालिक बताया। उन्होंने मांग की थी कि इसका प्रन्यासी (Trustee) पद वंशानुगत हो, ताकि उनके बाद उनका बेटा और फिर पोता इसके मालिक बन सकें" ।
तिवारी के अनुसार, कुमावत ने आरसीए के ₹200 करोड़ के चौंप स्टेडियम की जमीन, ₹40 करोड़ के एसेट्स और बैंक खाते में मौजूद ₹13 करोड़ पर अपना मालिकाना हक जताने का प्रयास किया, जो कि पूरी तरह अलोकतांत्रिक है।
पर्सनल लीगल फीस आरसीए के खाते से चुकाई (धोखाधड़ी का आरोप)
डीडी कुमावत द्वारा लगाए गए मानहानि के दावों और चेकों पर अन्य सदस्यों के हस्ताक्षरों के आरोपों पर पलटवार करते हुए आशीष तिवारी ने आरसीए के ऑफिस नोट दिखाए । उन्होंने कहा कि कुमावत सवाई माधोपुर डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (DCA) के अध्यक्ष थे। उन्होंने अपने व्यक्तिगत और डीसीए के कानूनी मामलों के वकील सुधीर गुप्ता को 24 लाख और अन्य किश्तों में लाखों रुपये का भुगतान आरसीए का फंड से करवा दिया।
तिवारी ने स्पष्ट किया, "आरसीए के नियम के मुताबिक किसी भी डिस्ट्रिक्ट एसोसिएशन या व्यक्तिगत केस का खर्च आरसीए वहन नहीं करता। कुमावत ने ऑफिस नोट पर यह लिखकर कि यह काम 'आरसीए के संगठन के बिहाफ पर' हो रहा है, धोखे से अप्रूवल लिया और चेक जारी करवाए"।
चार्जशीट छुपाकर बने थे कन्वीनर, पद के लिए थे अयोग्य
आशीष तिवारी ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि डीडी कुमावत जब कन्वीनर बने थे, तब उनके खिलाफ कोर्ट में एक क्रिमिनल केस में चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी । आरसीए के संविधान के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति पर चार्ज फ्रेम (आरोप तय) हो जाते हैं, तो वह चुनाव लड़ने या कन्वीनर पद के लिए पूरी तरह अयोग्य हो जाता है। कुमावत ने सरकार और संगठन से इस चार्जशीट की बात छुपाई और धोखे से पद हासिल किया ।
'भूमाफिया' होने और फर्जी चुनाव कराने का आरोप
आशीष तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि कुमावत जिस सोसाइटी में रहते हैं, वहां के लोगों ने भी उन पर धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया हुआ है । उन्होंने आरसीए का कन्वीनर बनने के बाद अपने ड्राइवर, चपरासी और नौकरों के नाम पर फ्लैट खरीदे और फर्जी चुनाव करवाकर वहां के अध्यक्ष बन बैठे इस मामले में अशोक नगर या संबंधित थाने में एफआईआर भी दर्ज है, जिससे साबित होता है कि वह भूमाफिया की तरह काम कर रहे हैं ।
अनुशासन समिति करेगी कार्रवाई, जेल जाने की नौबत
डीडी कुमावत द्वारा भाजपा सरकार के मंत्रियों, सांसदों और 'खेलो इंडिया' के बजट पर उठाए गए सवालों पर तिवारी ने कहा कि कुमावत का ज्ञान सीमित है । खेल मंत्री का खेल गतिविधियों में शामिल होना और आरसीए के करोड़ों के बिल माफ करवाना खेल को बढ़ावा देने का हिस्सा है। चूंकि कुमावत खुद भाजपा के कार्यकर्ता हैं और अपनी ही सरकार पर झूठे आरोप लगा रहे हैं, इसलिए पार्टी की अनुशासन समिति इसका कड़ा संज्ञान लेगी।
तिवारी ने अंत में कहा कि वर्तमान एडहॉक कमेटी पूरी तरह व्यवस्थित और बहुमत में है। घोटालों की जांच के लिए एक कमेटी बनाई जा रही है, जिसकी रिपोर्ट आते ही कुमावत के खिलाफ कानूनी एफआईआर दर्ज कराई जाएगी और उन्हें जेल जाना पड़ेगा।
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