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केरल में हुई तो यहां क्यों नहीं? कमिश्नर के बयान पर कांग्रेस का पलटवार, सवाल- रितु बराला की दर्ज नहीं FIR तो कांग्रेस ने क्यों खत्म किया धरना?

केरल में हुई तो यहां क्यों नहीं? कमिश्नर के बयान पर कांग्रेस का पलटवार, सवाल- रितु बराला की दर्ज नहीं FIR तो कांग्रेस ने क्यों खत्म किया धरना?
राजस्थान
21 Oct 2026, 05:26 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Jaipur Ritu Barala Zero FIR Congress Protest: NSUI की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला के साथ दिल्ली में कथित मारपीट के मामले में जयपुर में जीरो FIR दर्ज करने की मांग को लेकर राजस्थान पुलिस और कांग्रेस आमने-सामने हैं। जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने लिखित जवाब में कहा कि इसी घटना से जुड़ी शिकायत दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में पहले ही दी जा चुकी है और वहां दर्ज केस में जांच चल रही है। ऐसे में उन्हीं तथ्यों पर जयपुर में दूसरी FIR दर्ज करना विधि सम्मत नहीं है। कांग्रेस ने पुलिस के इस तर्क को खारिज करते हुए केरल में दर्ज जीरो FIR का जिक्र किया है।

सचिन मित्तल बोले- दिल्ली में पहले से दर्ज है मामला

जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने मीडिया को बताया कि 13 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हुए घटनाक्रम के संबंध में रितु बराला ने उसी दिन कनॉट प्लेस थाने में शिकायत दी थी। पुलिस का कहना है कि इस मामले में केस नंबर 291/2026 दर्ज है और रितु की शिकायत को भी जांच में शामिल किया गया है।

जब संबंधित घटना पर दिल्ली पुलिस पहले से संज्ञान लेकर जांच कर रही है, तो उन्हीं तथ्यों के आधार पर राजस्थान में दूसरी जीरो FIR दर्ज करना विधि सम्मत नहीं है। पुलिस ने ये भी कहा कि जीरो FIR का प्रावधान ऐसे मामलों में इस्तेमाल की जाती है, जब शिकायत उस थाने में दी जाती है जिसके पास घटना का क्षेत्राधिकार नहीं होता और शिकायत को संबंधित थाने तक भेजना होता है।

डोटासरा ने पूछा- केरल में FIR दर्ज हुई तो राजस्थान में क्यों नहीं?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पुलिस के लिखित जवाब को कानून की गलत व्याख्या बताया। उनका कहना है कि जब केरल में इसी घटनाक्रम से जुड़े आरोपों पर जीरो FIR दर्ज हो सकती है, तो राजस्थान पुलिस ऐसा करने से क्यों इनकार कर रही है?

डोटासरा ने सवाल उठाया कि अगर दिल्ली में FIR दर्ज होने का दावा किया जा रहा है, तो उसकी कॉपी कांग्रेस को दिखाई जाए। उनका तर्क है कि जिस केस का हवाला पुलिस दे रही है, उसमें रितु बराला की शिकायत को अलग FIR के रूप में दर्ज करने के बजाय पहले से दर्ज मामले में शामिल किया गया है। कांग्रेस का कहना है कि शिकायत पर स्वतंत्र रूप से कार्रवाई होनी चाहिए।

डोटासरा ने ये भी आरोप लगाया कि जयपुर पुलिस पर दिल्ली से दबाव है। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस अब इस विवाद को हाईकोर्ट और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएगी।

टीकाराम जूली बोले- FIR दर्ज होने का मतलब सजा देना नहीं

राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी पुलिस के रुख पर सवाल उठाए। उनका तर्क है कि FIR दर्ज होने का मतलब ये नहीं है कि किसी आरोपी को तुरंत दोषी ठहरा दिया जाएगा। FIR के बाद पुलिस जांच करती है और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई होती है।

जूली ने कहा कि अगर दिल्ली में मामला दर्ज है, तो उसकी जांच होने दी जाए, लेकिन अगर शिकायत पर कहीं भी उचित FIR दर्ज नहीं हुई है, तो कार्रवाई के लिए रास्ता खुला होना चाहिए। उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(1) का हवाला देते हुए जीरो FIR दर्ज करने की मांग का समर्थन किया।

रितु बराला का मामला और केरल कनेक्शन क्या है?

रितु बराला ने आरोप लगाया है कि 13 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद महिला पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की। कांग्रेस का कहना है कि इस घटना में उन्हें चोटें आईं और अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। इसी केस में NSUI कार्यकर्ता अथिरा सी. की शिकायत पर दिल्ली पुलिस के खिलाफ जीरो FIR दर्ज की गई थी। ये FIR तिरुवनंतपुरम के म्यूजियम पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई थी। अथिरा ने भी दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर मारपीट के आरोप लगाए थे।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अदालत जयपुर पुलिस के फैसले को सही ठहराएगी या कांग्रेस की मांग के अनुरूप आगे कार्रवाई का रास्ता खुलेगा? फिलहाल पुलिस और कांग्रेस के तर्क अलग-अलग हैं और इस विवाद का अंतिम कानूनी फैसला अदालत में ही हो सकता है।


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