मंदिर दौरों के बहाने वागड़ का सियासी रास्ता नाप रहे हैं सचिन पायलट!

Sachin Pilot: कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट कब क्या कर जाएं कुछ पता नहीं होता। सियायत में बढ़ाया गया उनका हर एक कदम एक अलग कहानी लिख देता है। कुछ ऐसी ही नई कहानी लिखी जा रही है प्रदेश के वागड़ क्षेत्र में। वो भी BAP सांसद और आदिवासी अंचल में अपनी पैठ बना चुके राजकुमार रोत की गैरमौजूदगी में। आदिवासी बहुल 4 जिलों का सचिन पायलट का दो दिन का दौरा है। इसी कड़ी में उन्होंने बांसवाड़ा के त्रिपुरा सुंदरी में जाकर दर्शन किए। डूंगरपुर में तीर्थस्थल बेणेश्वर धाम में शीश नवाया। भगवान महादेव का जलाभिषेक किया। पूजा-अर्चना की। ऐसे में सियासी पंडितों को कहना है कि ये सचिन पायलट की मंदिर दर्शन के बहाने वागड़ की नब्ज टटोलने की कोशिश भर है।
कार्यकर्ताओं से संवाद कर रहे हैं सचिन पायलट
सचिन पायलट आज दिन भर इन जिलों के कई इलाकों में जाकर कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं और उनसे संवाद कर रहे हैं। वो पहले डूंगरपुर के बेणेश्वर धाम गए, फिर आसपुर के डाक बंगला। फिर प्रतापगढ़ के धरियावद, सलूंबर, उदयुपर के वल्लभनगर के बंबोरा, कुराबड़, मालकी तूस, मावली के बिछड़ी गांव का कार्यक्रम है। यहां पर भी स्थानीय जनप्रतिनिधि और पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे।
BAP की वजह से वागड़ में सिमटती चली गई कांग्रेस
बीते कुछ सालों में वागड़ क्षेत्र जो कभी कांग्रेस को कोर वोटबैंक हुआ करता था, वो कांग्रेस की नजरअंदाजगी की वजह से पहले भारतीय ट्राइबल पार्टी यानी BTP और फिर BAP यानी भारत आदिवासी पार्टी के आने से कम हुआ। राजुकमार रोत के नेतृत्व में पार्टी ने इन जिलों में जल-जंगल-जमीन की लड़ाई मजबूत की। कारण यही था कि 2024 लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के स्थानीय नेता BAP से गठबंधन को लेकर असहज थे। इससे डर ही था कि BAP की वजह से ही कांग्रेस कमजोर हुई है।
दूसरा महेंद्रजीत सिंह मालवीया के कांग्रेस का दामन छोड़ने को भी कांग्रेस के वागड़ में कमजोर होने की वजह बताया गया। क्योंकि मालवीय के साथ कई स्थानीय कार्यकर्ता भी उनके साथ चले गए, जिससे सीधे नुकसान कांग्रेस को ही हुआ है।
BAP ने खुद को राष्ट्रीय नहीं बल्कि आदिवासी समाज से निकली हुई पार्टी के तौर पर ही स्थापित किया। जो आदिवासी समाज चाहता था।
सबसे बड़ी और मुख्य बात है कि पहले वागड़ में मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच होता था लेकिन अब लड़ाई सीधे BAP से है। क्योंकि वो वागड़ा में तीसरा विकल्प बन चुकी है। 2023 के विधानसभा चुनाव के वोटों में कांग्रेस, बीजेपी और BAP के बीच अंतर अपेक्षाकृत कम रहा है, जिससे साफ हुआ कि कांग्रेस का कोर वोटर खिसक रोत की पार्टी BAP को चला गया।
वागड़ का जातीय समीकरण साधेंगे पायलट
-वागड़ में मुख्य रूप से आसपुर, डूंगरपुर, बागीदौरा, कुशलगढ़, गढ़ी, घाटोल इलाके आते हैं। यहां पर अनुसूचित जनजाति जैसे भील, मीणा डामोर, गरासिया वर्ग आते हैं, जिनकी चुनाव में अनुमानित हिस्सेदारी 75-80 प्रतिशत है। ये लगभग सभी विधानसभा और लोकसभा सीटों पर असर रखते हैं।
-इसके अलावा OBC वर्ग जैसे पाटीदार, कलाल, जाट, यादव, कुमावत, सैनी, लोहार वर्ग भी 10-15 प्रतिशत का योगदान देता है। 3-5 प्रतिशत SC वर्ग का वोट है जो सीमित लेकिन प्रभावी वोट बैंक है। वहीं 5-8 प्रतिशक सामान्य वर्ग के वोट हैं। जो शहरी क्षेत्रों और कुछ विधानसभा सीटों में प्रभाव रखते हैं।
बस यही पूरा सियासी समीकरण जिसे सचिन पायलट फिर से साधने के लिए वागड़ के रास्तों को नापने निकल पड़े हैं। हालांकि पायलट की रणनीति कितनी काम आती है, ये तो आने वाले समय में ही पता चलेगा जब ये नीति वोटों में तब्दील होगी।
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