40 विला मामले में शिखर अग्रवाल पर कांग्रेस का नया हमला, Jewel of India और Fun Kingdom की जांच की मांग

जयपुर। राजस्थान में वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल से जुड़े 40 विला-कॉटेज खरीद मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर भजनलाल सरकार पर हमला तेज कर दिया है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने शिखर अग्रवाल मामले को राजस्थान में भ्रष्टाचार के बड़े खेल का हिस्सा बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कई IAS अधिकारी अपनी जेबें भरने में लगे हैं और बीजेपी सरकार तथा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संरक्षण में एक के बाद एक भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं।
खाचरियावास ने अब इस पूरे मामले की जांच का दायरा बढ़ाने की मांग करते हुए जयपुर के चर्चित Jewel of India और Fun Kingdom से जुड़े मामलों की भी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है।
Jewel of India में किन IAS और IPS अधिकारियों ने खरीदे फ्लैट?
खाचरियावास ने जयपुर के जेएलएन मार्ग स्थित Jewel of India प्रोजेक्ट का मुद्दा उठाते हुए मांग की है कि इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। खासतौर पर यह पता लगाया जाना चाहिए कि इस प्रोजेक्ट में किन-किन IAS और IPS अधिकारियों के साथ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने फ्लैट खरीदे हैं। फ्लैट खरीदने के लिए हुए लेन-देन और प्रोजेक्ट को जमीन आवंटित किए जाने की प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए।
दरअसल, अगस्त 2025 में एक मीडिया रिपोर्ट में एक पड़ताल की खबर पब्लिश हुई थी। जिसमें Jewel of India की जमीन के आवंटन और उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए थे। इस प्रोजेक्ट में कई वरिष्ठ IAS अधिकारियों और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा के फ्लैट होने की जानकारी सामने आई थी। रिपोर्ट में राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांश पंत, पूर्व मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, IAS संदीप वर्मा, IAS श्रेया गुहा और IAS आलोक गुप्ता के नाम भी सामने आए थे।
रिपोर्ट में जमीन के पुराने आवंटन और बाद में कॉमर्शियल इस्तेमाल के लिए जारी पट्टे की वैधता पर भी सवाल उठाए गए थे। इसमें बताया गया था कि 1965 में कैपस्टन मीटर को औद्योगिक इस्तेमाल के लिए जमीन आवंटित की गई थी। बाद में जमीन के एक हिस्से के सब-लीज और जय ड्रिंक्स प्राइवेट लिमिटेड को कॉमर्शियल पट्टा जारी किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठे।
वहीं, तत्कालीन मुख्य सचिव सुधांश पंत ने रिपोर्ट में कहा था कि उन्हें जमीन के स्वामित्व को लेकर किसी विवाद की जानकारी नहीं थी और कंपनी के पास JDA का पट्टा तथा स्वीकृत नक्शा था। पूर्व मुख्य सचिव राजीव स्वरूप ने भी कहा था कि मामला सुलझ चुका है।
अब खाचरियावास ने इस पूरे मामले की जांच की मांग उठाकर एक बार फिर इस प्रोजेक्ट को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
‘Fun Kingdom की जमीन के आवंटन और लेन-देन की भी जांच हो’
कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने जयपुर के Fun Kingdom से जुड़ी जमीन के आवंटन और उससे जुड़े तमाम लेन-देन की भी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि ये पता लगाया जाना चाहिए कि जमीन किस प्रक्रिया के तहत आवंटित हुई, किन शर्तों पर दी गई।
गौरतलब है कि जयपुर के मानसरोवर स्थित Fun Kingdom की जमीन का मामला पहले भी कानूनी विवादों में रहा है। राजस्थान हाईकोर्ट के 6 जुलाई 2023 के आदेश में दर्ज मुकदमे मुताबिक, करीब 17.05 एकड़ जमीन 27 जनवरी 1993 को Pan India Paryatan Limited को एम्यूजमेंट पार्क स्थापित करने के लिए आवंटित की गई थी। इसके बाद 1995 में 52,601 वर्गमीटर जमीन की लीज डीड पूरी हुई और 1996 में पार्क का संचालन शुरू हुआ। बाद में लीज अधिकारों के ट्रांसफर को लेकर RIICO और Divya Moti Hotels and Resorts के बीच विवाद सामने आया।
हाईकोर्ट का ये आदेश मामले को कमर्शियल कोर्ट में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था। दरअसल, वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा करीब ढाई साल में एक ही कंपनी से 40 विला और कॉटेज खरीदने का मामला सामने आया था। ये संपत्तियां उदयपुर के बुझड़ा और अलवर के अजबगढ़ स्थित रिसॉर्ट में खरीदी गई थीं। इनकी कुल कीमत करीब 6.16 करोड़ रुपये बताई गई है।
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