'तेरा बाप मरे या जिए, चालान तो कटेगा...', पिता को हॉस्पिटल ले जा रहे युवक को पुलिस ने रोका, चाबी छीनी, फिर इलाज में देरी से हो गई मौत

Tonk Traffic Police Case: राजस्थान के टोंक से मानवता को झकझोरने वाला मामला सामने आया है। यहां पर एक व्यक्ति की जान इसलिए चली गई क्योंकि एक पुलिसवाला चालान करने में व्यस्त था। ऐसे में बुर्जुग को समय पर हॉस्पिटल नहीं ले जाया जा सका और उनकी मौत हो गई। अब इस मामले को पूरा सिलेसिलेवार तरीके से समझते हैं।
महेंद्र यादव नामक युवक ने बताया कि उनके पिता की 14 जून को अचानक तबीयत बिगड़ गई। वे किसी काम से पिता के साथ पीपलू गए थे। पिता को कोई बीमारी नहीं थी और न ही कोई इलाज चल रहा था। पीपलू से वापस लौटते समय उसके पिता की अचानक तबीयत बिगड़ गई। पिता ने कहा कि उसके सीने में दर्द हो रहा है। दोस्त की मदद से पिता को बाइक से ही सोहेला होते हुए टोंक के सहादत हॉस्पिटल ले जा रहा था।
एक घंटे तक रोककर रखा
इस दौरान छावनी चौराहे के पास यातायात पुलिसकर्मी राजकुमार शर्मा ने उनको बिना हेलमेट के कारण रोक लिया। पुलिसवाले ने कहा कि चालान होकर रहेगा। ये सब चालान से बचने के तरीके हैं। तेरा बाप मरे या जिए, मुझे कोई मतलब नहीं है। चालान तो कटकर ही रहेगा। इस दौरान बाइक की चाबी भी पुलिसवाले ने निकाल ली। इस दौरान करीब एक घंटा खराब हो गया। इसके बाद पिता की हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें पुलिस लाइन के बाहर फर्श पर लेटाना पड़ा।
एसपी बोले जांच के बाद होगी कार्रवाई
महेंद्र ने बताया कि चालान काटने के बाद पुलिसवाले ने बाइक की चाबी वापस दी। इसके बाद पिता को लेकर हॉस्पिटल पहुंचा। जहां उन्हें इमरजेंसी से आईसीयू में शिफ्ट किया गया। लेकिन दोपहर दो बजे पिता की मौत हो गई। वहीं इस पूरे मामले में सआदत हॉस्पिटल की डॉक्टर दिशा साहनी ने बताया कि शिवजी लाल को घबराहट और बढ़े हुए रक्तचाप की स्थिति में लाया गया था। उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट भी दिया गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। मामले में पुलिस अधीक्षक ने कहा कि शिकायतकर्ता के आरोपों का सत्यापन कराया जाएगा। जांच में जो भी तथय सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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