उदयपुर में बच्चों से भरी क्लास की छत का गिरा प्लास्टर, होते-होते बचा झालावाड़ स्कूल कांड

Udaipur School Collapse: राजस्थान में एक बार फिर सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों ने बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। उदयपुर के भींडर में एक सरकारी स्कूल की छत का प्लास्टर उस वक्त भरभराकर गिर गया, जब क्लास में 32 बच्चे पढ़ रहे थे। सोचिए, अगर प्लास्टर की जगह पूरी छत गिर जाती तो क्या होता।
हादसे के वक्त क्लास में थे 32 बच्चे
मामला भींडर पंचायत समिति क्षेत्र की वाणिया तलाई ग्राम पंचायत के राजकीय प्राथमिक विद्यालय नारदा का है। मंगलवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे, कक्षा में 32 बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान अचानक छत का प्लास्टर नीचे आ गिरा। प्लास्टर टेबल-कुर्सियों और फर्श पर बिखर गया। हादसे में गणेशलाल, ओमप्रकाश और कृष्णा नाम के तीन बच्चे घायल हो गए। गनीमत रही कि छत का सिर्फ प्लास्टर गिरा। अगर छत का पूरा हिस्सा बच्चों के ऊपर गिर जाता तो तस्वीर बेहद भयावह हो सकती थी।
क्या झालावाड़ स्कूल जैसे हादसे का इंतजार कर रही सरकार?
यहीं से सबसे बड़ा सवाल उठता है कि आखिर सरकार कब चेतेगी? राजस्थान ने हाल ही में झालावाड़ के उस दर्दनाक हादसे को देखा है, जहां स्कूल की जर्जर इमारत बच्चों की जान पर भारी पड़ी थी। ऐसे में सवाल ये है कि क्या सरकार को हर बार किसी बड़े हादसे का इंतजार करना पड़ेगा? क्या तब कार्रवाई होगी
जब कोई बच्चा मलबे के नीचे दब जाएगा? उदयपुर के इस स्कूल में हादसे के बाद अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल बच्चों को भींडर के राजकीय जिला चिकित्सालय ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद बच्चों को घर भेज दिया गया।
स्कूल में वीडियोग्राफी तक की बैन
सवाल सिर्फ इन तीन बच्चों का नहीं है। सवाल उन 32 बच्चों का है, जो उस वक्त उसी कमरे में मौजूद थे। सवाल प्रदेश के उन तमाम सरकारी स्कूलों का है, जहां बच्चे जर्जर इमारतों के बीच पढ़ने को मजबूर हैं। और यहां एक और सवाल बेहद गंभीर है कि जब स्कूलों में मीडिया और बाहरी लोगों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी पर रोक लगाने जैसे फैसले किए जाते हैं तो क्या स्कूलों की जर्जर हालत कैमरे से छिपाने से समस्या खत्म हो जाएगी? अगर बैन लगाया गया है तो लगाया गया लेकिन स्कूलों की हालत कब सुधरेगी? क्योंकि कैमरा बंद होने से जर्जर छत मजबूत नहीं हो जाती और तस्वीरें सामने नहीं आने से बच्चों की जान का खतरा खत्म नहीं होता।
उदयपुर में ये हादसा बड़ा हादसा होते-होते बच गया लेकिन सवाल यही है। क्या सरकार इस चेतावनी को गंभीरता से लेगी? या फिर अगली बार किसी स्कूल की छत गिरने का इंतजार किया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं जिम्मेदारी है और सरकार को तय करना होगा। राजस्थान के स्कूलों में बच्चे पढ़ेंगे या अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ेंगे?
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