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हनुमान बेनीवाल और टीकाराम जूली ने DIPR टेंडर पर घोटाले का लगाया आरोप, जानें क्या है मामला

हनुमान बेनीवाल और टीकाराम जूली ने DIPR टेंडर पर घोटाले का लगाया आरोप, जानें क्या है मामला
राजस्थान
22 May 2026, 12:02 pm
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

DIPR Scam: राजस्थान की सियासत में इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर सत्ता के गलियारों तक, सिर्फ एक ही चर्चा सबसे तेज़ है—और वो है सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) का वो कथित 'टेंडर खेल', जिसने पूरी सरकार को विपक्ष के निशाने पर ला खड़ा किया है। सीधे आरोप सूबे के मुखिया, यानी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajan Lal Sharma) के अधीन आने वाले विभाग पर लग रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि अपने चहेतों को मलाई खिलाने के लिए नियमों को ही ताक पर रख दिया गया।

हनुमान बेनीवाल ने लगाए ये आरोप

इस पूरे मामले में सोशल मीडिया पर टेंडर की शर्तों में बदलाव के स्क्रीनशॉट लगातार वायरल हो रहे हैं, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार को चारों तरफ से घेर लिया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो और सांसद हनुमान बेनीवाल ने सीधे मुख्यमंत्री की 'नीति और नीयत' पर सवाल उठा दिए हैं। बेनीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर हुंकार भरते हुए लिखा कि निष्पक्षता और पारदर्शिता लोकतंत्र की मूल भावना है, लेकिन यहाँ खेल कुछ और ही चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के ही एक प्रवक्ता के परिवार की फर्म को फायदा पहुँचाने के लिए टेंडर की शर्तों में गुपचुप तरीके से बदलाव कर दिया गया।

टीकाराम जूली ने भी ACB जांच की उठाई मांग

दूसरी तरफ, कांग्रेस नेता और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सरकार पर सीधा हमला बोला है। जूली ने तो इसे मुख्यमंत्री की नाक के नीचे पनपा 'भ्रष्ट तंत्र' करार दे दिया है। उनका कहना है कि चहेती फर्म को फायदा पहुँचाने के लिए टेंडर की पूर्व निर्धारित शर्तों को बीच में ही बदल दिया गया। टीकाराम जूली ने सीधे चुनौती देते हुए पूछा है कि क्या अब इस मामले में एसीबी (ACB) की जांच कराई जाएगी?

उनका सवाल है कि क्या वाकई बीजेपी प्रवक्ता के भाई की फर्म को फायदा पहुँचाने के लिए पूरी व्यवस्था को बदला गया? जो विभाग खुद मुख्यमंत्री संभाल रहे हैं, उसमें बिना ऊपरी शह के नियमों में हेरफेर कैसे संभव है? क्या सरकार इस टेंडर प्रक्रिया को तुरंत रोककर इसकी उच्च स्तरीय जांच कराएगी?

मुख्यमंत्री के सीधे नियंत्रण वाले विभाग पर इस तरह के गंभीर आरोप लगने के बाद राजस्थान की राजनीति में भूचाल आ गया है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक सरकार या डीआईपीआर (DIPR) विभाग की तरफ से कोई आधिकारिक बयान या सफाई सामने नहीं आई है।


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