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हनुमान बेनीवाल के कानूनी नोटिस वाले बयान पर मदन राठौड़ का पलटवार, बोले- 'विरोध के नाम हुड़दंग करने का अधिकार किसी को नहीं'

हनुमान बेनीवाल के कानूनी नोटिस वाले बयान पर मदन राठौड़ का पलटवार, बोले- 'विरोध के नाम हुड़दंग करने का अधिकार किसी को नहीं'
राजस्थान
31 May 2026, 01:30 pm
रिपोर्टर : Rakesh Choudhary

RLP chief Hanuman Beniwal: राजस्थान की सियासत में पिछले 72 घंटों से एक नेता सबसे अधिक चर्चा में हैं जिनका नाम है हनुमान बेनीवाल। भैंराणा धाम में साधु-संतों के समर्थन में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बेनीवाल ने सीएम भजनलाल शर्मा और कैबिनेट पर की गई टिप्पणी के बाद सियासत काफी गरमाई हुई है। बेनीवाल ने सीएम को मुर्खाधिराज और मंत्रियों को मूर्खों की कैबिनेट कहा था। इसके बाद बीजेपी बेनीवाल पर हमलावर हो गई। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इसकी अगुवाई की। उन्होंने बेनीवाल पर युवाओं को नशा खोरी की आदत डालने और गलत राह पर ले जाने जैसे कई बयान दिए। इसके बाद मदन राठौड़ कुचामन पहुंचे वहां पर आरएलपी के कार्यकर्ताओं ने उनको काले झंडे दिखाए। इसके बाद राठौड़ ने एक बार फिर बेनीवाल को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें समाज से बहिष्कार करने की बात कही।

मदन राठौड़ को कानूनी नोटिस देंगे

मदन राठौड़ के इस बयान के बाद जयपुर में मीडिया से मुखातिब होते हुए बेनीवाल ने राठौड़ पर निशाना साधा। उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष पर कानूनी कार्रवाई करने की बात कह डाली। बेनीवाल ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति ने जिस प्रकार की बातें कही वह समझ से परे है। बेनीवाल ने आगे कहा कि वे इस बयान को केवल राजनीतिक बयान मानकर चुप बैठने वालों में नहीं हैं। इस आपत्तिजनक बयान के खिलाफ विधिक राय लेने के लिए मैं हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के संपर्क में हूं। उन्होंने आगे कहा कि बहुत जल्द ही उन्हें कानूनी नोटिस दिया जाएगा।

कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं

बेनीवाल के इस बयान के बाद राठौड़ ने भी पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि आरएलपी प्रमुख अपनी ढहती हुई राजनीति को बचाने के लिए राजस्थान के सीधे-साधे युवाओं को भटकाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है और हमारे लोकतांत्रिक ढांचे में किसी भी व्यक्ति को सरकार या नीति के खिलाफ असहमति प्रकट और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है। लेकिन अहसमति के नाम पर किसी भी नेता को कानून अपने हाथ में लेने और युवाओं को उकसाने वाले बयान देने का अधिकार नहीं है।

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