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इडाणा माता मंदिर में खुद ही अचानक लग जाती आग, आज तक नहीं बन पाया मंदिर, खुले चौक में ही बैठी हैं माता

इडाणा माता मंदिर में खुद ही अचानक लग जाती आग, आज तक नहीं बन पाया मंदिर, खुले चौक में ही बैठी हैं माता
राजस्थान
23 May 2026, 05:44 pm
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

भारत, ये सिर्फ़ एक देश नहीं, रहस्यों का एक जीवंत ग्रंथ है। यहां वो मंदिर हैं जिन्हें देखकर विज्ञान भी चुप हो जाता है। कहीं खंभे हवा में झूलते हैं, कहीं देवताओं को मदिरा भोग के तौर पर लगाई जाती है। कहीं पानी से दीपक जल जाता है। लेकिन आज हम आपको जिस मंदिर में लेकर चल रहे हैं वो इन सब चमत्कारों से कहीं आगे है। क्योंकि यहां देवी अग्नि स्नान करती हैं। जी हां, आपने सही सुना—अग्नि स्नान।

ऐसी अग्नि, जो अचानक प्रकट होती है। 10 से 20 फीट तक लपटें उठाती है, पर जलाती हैं तो सिर्फ़ देवी का श्रृंगार और किसी वस्तु को एक खरोंच तक नहीं! ये है ईडाणा माता का अग्नि स्नान मंदिर। ये चमत्कारिक मंदिर, ईडाणा माता मंदिर उदयपुर से लगभग 60 किमी दूर अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित है।

मंदिर की नहीं है कोई छत, खुले चौक में बैठी हैं माता

खास बात यह है कि मंदिर की कोई छत नहीं है। ये माँ का एक खुला दरबार है। माना जाता है कि ये स्थान मेवाड़ की महारानी ईडाणा के नाम पर प्रसिद्ध हुआ। अब आते हैं उस चमत्कार पर जिसने इस मंदिर को भारत के रहस्यमयी स्थलों की सूची में शामिल कर दिया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक हर महीने 2 से 3 बार देवी की प्रतिमा के पास अचानक अग्नि प्रज्वलित हो जाती है।

ये अग्नि इतनी तेज होती है कि इसकी लपटें 10 से 20 फीट तक उठती हैं। लेकिन चमत्कार देखिए मूर्ति को कुछ नहीं होता। पंडाल, चौक, दरबार—कुछ नहीं जलता। सिर्फ़ श्रृंगार ,चुनरी, फूल, यही अग्नि में स्वाहा हो जाते हैं।

लोग कहते हैं कि ये कोई साधारण आग नहीं, ये मां का अग्नि स्नान है। आज तक कोई नहीं समझ पाया कि यह आग कैसे भड़कती है। वैज्ञानिकों के लिए भी यह अब तक पहेली बनी हुई है।

लकवा ग्रसित लोग भी हो जाते ठीक

इस मंदिर को लेकर सिर्फ़ रहस्य ही नहीं, भक्ति भी उतनी ही गहरी है। यहां मान्यता है कि लकवे से ग्रसित रोगी मां के दरबार में आकर ठीक हो जाते हैं। संतानहीन दंपति यहां झूला चढ़ाते हैं और मन्नत पूरी होने पर भक्त त्रिशूल अर्पित करते हैं।

जैसे ही अग्नि स्नान की खबर फैलती है आसपास के गांवों से भारी संख्या में लोग जमा हो जाते हैं। एक बड़ा सवाल ये भी है कि इतना प्रसिद्ध स्थान होने के बावजूद यहां आज तक स्थायी मंदिर निर्माण क्यों नहीं हो पाया? स्थानीय पुजारियों के मुताबिक मां पर अधिक भार होने पर वो ज्वालादेवी का रूप धारण कर लेती हैं और आग इतनी विकराल हो जाती है कि किसी भी संरचना को क्षति पहुंचा सकती है। इसी वजह से मां का दरबार हमेशा खुले आकाश के नीचे ही रहा है।

भारत के मंदिर सिर्फ़ पूजा के स्थल नहीं बल्कि श्रद्धा, रहस्य और चमत्कार की जीवित कहानियां हैं। ईडाणा माता का यह अग्नि स्नान एक ऐसा रहस्य है जिसे न तो विज्ञान समझ सका है

और न ही समय मिटा सका है। क्या यह चमत्कार है? क्या यह दिव्य शक्ति है? या प्रकृति का कोई अनछुआ रहस्य? ये फैसला आज तक कोई नहीं कर सका।


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