महिलाओं ने इतनी खरी-खोटी सुनाई कि रोने लगी महिला अधिकारी, जानें पूरा मामला

Viral: राजस्थान में पारा 45 डिग्री के पार है, लेकिन नसों में दौड़ने वाले खून से ज्यादा उबाल अब सड़कों पर दिख रहा है। मामला झुंझुनूं के नवलगढ़ का है, जहां 'नल से जल' का वादा तो दूर, गले को तर करने वाली बूंदों के लिए संग्राम छिड़ा है। इन सबसे जनता इतनी परेशान हो गई कि जब महिला JEN उनके पास आई तो महिलाओं ने उन्हें इतनी खरी-खोटी सुना दी कि महिला अधिकारी की आंखों से आंसुओं की नदी बहने लगी। फिर क्या था, इस नजारे का वीडियो सोशल मीडिया पर सरपट दौड़ गया और वायरल हो गया।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल ये मामला झुंझुनूं की ढाणियां पंचायत का है। यहां पिछले 5-6 महीनों से लोग पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं। बीते गुरुवार को शाम को जब जलदाय विभाग की जेईएन (JEN) अंतरा मीणा निरीक्षण के लिए पहुंचीं, तो उन्हें अंदाजा नहीं था कि जनता का सब्र इस कदर टूट चुका है।
गांव की महिलाओं ने अधिकारी अंतरा मीणा की गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया। गुस्सा इतना कि JEN को बचने के लिए गाड़ी के भीतर बैठना पड़ा। लेकिन महिलाओं ने गाड़ी का दरवाजा खोलकर उन्हें वो आईना दिखाया, जो शायद कागजों पर बैठे अधिकारियों को कभी नजर नहीं आता।
महंगे टैंकर मंगवाने को मजबूर
बता दें कि गांव में दो-दो ट्यूबवेल और पानी की टंकी है। लेकिन सप्लाई सिर्फ 2 से 5 मिनट ही होती है। आरोप है कि गांव का पानी शहर की तरफ डायवर्ट किया जा रहा है और कई घरों में तो नलों से गंदा पानी आ रहा है। जिसकी वजह से प्यास बुझाने के लिए गरीब ग्रामीणों को मजबूरन महंगे टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें सबसे ज्यादा चर्चा उस इसी बात की हो रही है कि जेईएन अंतरा मीणा दबाव और खरी-खोटी सुनकर फूट-फूट कर रोने लगीं। लेकिन वहां मौजूद एक महिला का जवाब पूरी व्यवस्था के गाल पर तमाचा था।
यहां महिलाओं ने कहा- "मैडम, तुम्हें आज कोसा गया तो तुम रो पड़ीं, हम तो पिछले 6 महीने से प्यास के मारे रो रहे हैं!" ये केवल एक अधिकारी और ग्रामीणों की लड़ाई नहीं है, ये टूटे हुए सिस्टम की कहानी है।
JEN ने उच्चाधिकारियों को घुमाया फोन
हालांकि, जेईएन ने फोन पर उच्च अधिकारियों को अपनी सुरक्षा को लेकर शिकायत की, लेकिन मौके पर मौजूद युवकों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया। अब सवाल ये है कि जब बजट पास होते हैं, योजनाएं बनती हैं, तो फिर धरातल पर 5 मिनट की सप्लाई ही क्यों होती है? क्यों एक महिला अधिकारी को जनता के गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है जबकि असली जिम्मेदार AC के कमरों में बैठे हैं।
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