कोटा मेडिकल कॉलेज मामला: प्रसूताओं की मौत के बाद ड्रग विभाग का सख्त आदेश, इंजेक्शन, ग्लूकोज बोतलें, दवाइयों पर बैन

कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत के बाद अब ड्रग कंट्रोल विभाग ने बड़ा एक्शन लिया है। स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाते हुए कुछ इंजेक्शनों, ग्लूकोज की बोतलों और दूसरी दवाइयों और मेडिकल डिवाइसों की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। ये कदम गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को लेकर उठाया गया माना जा रहा है।
ड्रग विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि इन उत्पादों में आपूर्ति, उत्पादन में नियमों का उल्लंघन किया गया है। इससे आम लोगों की सेहत पर खतरा हो सकता है। विभाग अब उन सभी दवाओं और उपकरणों की सूची तैयार कर रहा है, जिन्हें बैन किया गया है, साथ ही आगे की जांच जारी है।
कौन-कौन से उत्पाद बैन किए गए?
ड्रग विभाग ने जिन उत्पादों पर बैन लगाए हैं, उनमें खास तरह के इंजेक्शन सॉल्यूशन्स, जिनके संदिग्ध गुणवत्ता मानकों को लेकर अधिकारियों ने चेतावनी जारी की है, ग्लूकोज की बोतलें जिनका उत्पादन या लेबलिंग मानक उल्लंघन के चलते खारिज हुआ है। इसके साथ ही कुछ मेडिकल डिवाइस और उपयोगी दवाइयां जिन्हें विभाग ने असुरक्षित करार दिया है।
डिपार्टमेंट ने साफ किया है कि इनकी बिक्री और इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। अगर कोई दुकान, फार्मेसी या हॉस्पिटल इन्हें रखता है ये बेचता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यहां गौर करने वाली बात ये है कि इनमें 15 ऐसी दवाइयां हैं जो RMSCL की तरफ से मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत यहां कोटा मेडिकल कॉलेज में सप्लाई हो रही थीं। ऐसे में इन पर भी बैन लगा दिया है।
विभाग का बड़ा दावा और कार्रवाई
ड्रग विभाग ने कहा है कि यह कदम जनता की सुरक्षा और चिकित्सा मानकों को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि बगैर मान्यता या वायरस सुरक्षा मानकों की जांच के कुछ उत्पाद बाज़ार में उपलब्ध पाए गए, जिसके चलते इन्हें निर्देशानुसार बिक्री से हटाने का आदेश दिया गया।
इधर कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत और कई प्रसूताओं की किडनी फेल होन के मामले में भजनलाल सरकार ने 4 डॉकटर्स समेत 6 लोगों पर एक्शन लिया है। वहीं संविदा पर लगे एक डॉक्टर को बर्खास्त कर दिया है। एक डॉक्टर को सस्पेंड किया है, दो डॉक्टर्स को नोटिस दिए गए हैं वहीं दो नर्सिंग कर्मियों को भी सस्पेंड किया है। इस मामले को लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि जो भी ये केस सामने आया है, वो बहुत गंभीर है और प्रारंभिक जांच में इनकी लापरवाही सामने आई है, जिसके चलते ये एक्शन लिया गया है।
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