NEET UG 2026: 30 लाख में खरीदकर 10-15 लाख में बेचा एक पेपर... मुख्य आरोपी ने उगला- कैसे गुरुग्राम से जयपुर और फिर सीकर तक चला ‘खेल’

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में अब जांच की आंच उन सफेदपोश चेहरों तक पहुंचने वाली है, जिन्होंने शिक्षा के मंदिर को व्यापार बना दिया। मंगलवार की रात राजस्थान की राजधानी जयपुर में हलचल तब बढ़ गई, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI की एक हाई-प्रोफाइल टीम (SOG) के मुख्यालय पहुंची। इधर बीते दिन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने एक बयान में ये कह दिया था कि नीट पेपर लीक का राजस्थान से कोई कनेक्शन नहीं है। जिस पर काफी गतिरोध पैदा हो गया है। क्योंकि जयपुर और सीकर में लीक का खुलासा पेपर के दिन ही हो गया था बावजूद इसके इस तरह के बयान ने अब नई बहस छेड़ दी है।
आज CBI की स्पेशल कोर्ट में पेश होंगे आरोपी
जी हां, अब इस पूरे मामले की कमान CBI के हाथों में है। महीनों से चल रही SOG की जांच और राज्य पुलिस की धरपकड़ के बाद अब इस केस में 'सेंट्रल एंट्री' हो चुकी है। SOG के IG अजय लांबा ने देर रात इसकी पुष्टि की, कि राजस्थान के अलग-अलग कोनों से पकड़े गए दो दर्जन से ज्यादा संदिग्धों को CBI के हवाले कर दिया गया है। ऐसे में अब आज इन लोगों को जयपुर की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। यहां CBI इनकी ट्रांजिट रिमांड मांगेगी।
लेकिन इस जांच में जो सबसे सनसनीखेज खुलासा हुआ है, वो सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे। ये नकल माफिया बेहद शातिर थे। इन्होंने असली पेपर को सीधे नहीं बेचा, बल्कि उसे 'गेस पेपर' का नाम दिया। इस 'गेस पेपर' में कुल 400 सवाल थे। लेकिन चालाकी देखिए-इन 400 सवालों के बीच में 3 मई को होने वाली परीक्षा के बायोलॉजी के सभी 90 सवाल और केमिस्ट्री के 45 असली सवाल छिपा दिए गए थे। छात्रों को गुमराह किया गया और उनसे कहा गया कि बस इन 400 सवालों को रट लो और डॉक्टर बनने का सपना पूरा हो जाएगा।
आखिर इस खेल की कीमत क्या थी? SOG की जांच में सामने आया है कि एक-एक पेपर की कॉपी 10 से 15 लाख रुपये में बेची गई लेकिन माफिया यहीं नहीं रुके। उन्होंने हरियाणा और दिल्ली के सिंडिकेट्स के साथ मिलकर एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया था।
कल पकड़ा मुख्य आरोपी- बताया राजस्थान से कनेक्शन
बीते मंगलवार को इस पेपर लीक का मुख्य आरोपी शुभम खैरनार को नासिक पुलिस और जांच ऐजेंसियों ने दबोच लिया। उसने बताया कि कैसे पेपर प्रिंटिंग प्रेस से निकालकर हरियाणा के गुरुग्राम के नेटवर्क तक पहुंचाया। फिर जयपुर के दो भाइयों, मांगीलाल और दिनेश बीवाल (जमवारामागढ़ के रहने वाले) ने इस गैंग से 26 अप्रैल को 30 लाख रुपए में नीट का पेपर खरीदा फिर ये पेपर इन्होंने सीकर के छात्रों को 10-15 लाख में बेचा।
सीकर में कॉलेज संचालकों के साथ स्टूडेंट्स ने भी व्हाट्सअप ग्रुप और चैनल बनाए हुए थे। जिसमें पेपर से जुड़ी हर बात होती थी. इन भाइयों ने इन्हीं ग्रुप को पैसे लेकर ये पेपर दिए थे। कहा जा रहा है कि इन दो भाइयों में से एक तो राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। इन भाइयों के परिवार से ही बीते साल 4 बच्चे नीट में सिलेक्ट हुए थे।
SOG ने CBI को केवल आरोपी ही नहीं सौंपे हैं, बल्कि डिजिटल सबूतों का वो पुलिंदा भी थमाया है, जो इस केस की जड़ तक जाएगा। इसमें पैसों के लेन-देन के पुख्ता सबूत शामिल हैं। CBI के पास अब इनके बैंक ट्रांजेक्शन, कॉल डिटेल्स और व्हाट्सएप चैट है, जो सीधे तौर पर हरियाणा के सिंडिकेट से तार जोड़ते नजर आ रहे हैं।
CBI के लिए सबसे बड़ी चुनौती!
अब सवाल यह है कि क्या CBI इस पेपर लीक के 'मास्टरमाइंड' तक पहुँच पाएगी? अब तक की जांच बताती है कि लीक का स्रोत एक नहीं बल्कि कई राज्यों में फैला हो सकता है। जयपुर के अलावा, जोधपुर, भरतपुर और हरियाणा के कुछ इलाकों में इन आरोपियों ने अपने सुरक्षित ठिकाने बनाए हुए थे।
CBI की प्राथमिकता अब उन संदिग्धों से पूछताछ करना है जिन्होंने पेपर हासिल किया और उन्हें आगे सप्लाई किया। आज कोर्ट में होने वाली पेशी के बाद, CBI इन लोगों को दिल्ली ले जा सकती है ताकि बड़े स्तर पर आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जा सके।
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