आखिर डिप्टी CM के सामने क्यों बिफर पड़े साधु-संत, जानिए क्या है पूरा मामला

Jaipur: राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने जयपुर जिले के दूदू इलाके में ‘रात्रि चौपाल’ कार्यक्रम की शुरुआत की और आमजन की समस्याएं सुनीं। लेकिन इसी कार्यक्रम में हंगामा तो मच गया जब सुनवाई में आए साधु-संतों ने डिप्टी CM के सामने ही विरोध जताना शुरू कर दिया। साधुओं की नाराजगी देखते हुए वहां खड़े प्रशासनिक अधिकारियों के भी हाथ-पांव फूल गए। उन्होंने साधुओं को समझाने-बुझाने की कोशिश की। डिप्टी CM भी उन्हें समझाते दिखे लेकिन ये साधुओं का आक्रोश था कि थमने का नाम नहीं ले रहा था। यहां हम आपको बता रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या मामला है, क्या मुद्दा है, जिस पर साधु-संत इतने नाराज दिख रहे हैं।
क्यों है साधुओं में आक्रोश
दरअसल ये आक्रोश था भैराणा धाम में RIICO विस्तार को लेकर। यहां के बिचनू में रीको भगाओ, भैराणा धाम बचाओ का लंबे समय से आंदोलन चल रहा है। संतों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई है कि धार्मिक क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार कैसे किया जा सकता है। ये साधु-संत भैराणा धाम को औद्योगिक प्रदूषण से बचाने के लिए धर्मयुद्ध लड़ रहे हैं। इतना ही नहीं 8 मई को ये 21 किलोमीटर की महापरिक्रमा पूरी करने के बाद 12 जगहों पर जिंदा समाधि लेने की तैयारी भी कर रहे हैं।
इन संतों का कहना है कि धाम विकास के नाम पर इस धाम की शांति, पर्यावरण को खत्म किया जा रहा है। यहां के आध्यात्मिक स्वरूप को तहस-नहस किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस तरह के अंधाधुंध विकास के लिए वे 40 हजार पेड़ों की बलि कतई बर्दाश्त नहीं कर सकते। इससे यहां के पशु-पक्षियों के जीवन खत्म हो जाएगा। शुद्ध पानी नहीं बचेगा। ये लडाई सिर्फ जमीन की नहीं है बल्कि धर्म की है, आध्यात्म की है, आने वाली पीढ़ियों के जीवन बचाने की है।
क्योंकि उद्योगों से निकलने वाला केमिकल प्रदूषण इस प्रकृति को नष्ट कर देगा। संतों का ये भी कहना है कि इसके लिए वे पहले कई बार मंत्रियों तक को ज्ञापन दिए हैं। साथ ही SDM, तहसीलदार को भी ये शिकायत सौंपी है लेकिन कोई कार्रवाई अब तक नहीं हुई है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी इन साधुओं ने जिंदा समाधि लेने की चेतावनी दी थी लेकिन तब हवामहल विधायक बालमुकुंदाचार्य ने मौके पर पहुंचकर इनसे समझाइश की थी। जिसके बाद इन संतों ने सरकार को 7 दिन का समय दिया था और ये भी कह दिया था कि अगर धाम को बचाने के लिए कुछ नहीं किया गया तो वे जिंदा समाधि ले लेंगे।
दूदू में उपमुख्यमंत्री डॉ प्रेमचंद बैरवा की रात्रि चौपाल में साधु संत नाराज। pic.twitter.com/40scBOmaBR
— Ashok Shera (@ashokshera94) May 6, 2026
रिको का विस्तार क्यों हो रहा है?
दरअसल ये योजना रीको की तरफ से राजस्थान के औद्योगिक इलाकों को बेहतर बनाने, एक-दूसरे से उन्हें जोड़ने के लिए लाई गई है। ये रीको की सड़क विकास योजना है। इसमें 38 सडकों का विकास होगा। जिसकी कुल लंबाई 205 किमी है। इसमें 36 औद्योगिक इलाके शामिल हैं। इनमें चौड़ीकरण और मरम्मत में 290 करोड़ रुपए खर्च होंगे। ये खर्च आधा-आधा हिस्सा रीको और PWD उठाएगा।
इससे अजमेर, बालोतरा, बांसवाड़ा, भरतपुर, भीलवाड़ा, चूरू, दौसा, जयपुर, जालोर, झालावाड़, कोटा, सवाई माधोपुर, श्रीगंगानगर, उदयपुर जैसे जिलों के औद्योगिक इलाकों को फायदा देने की दावा किया गया है।
रात को डिप्टी CM के सामने साधुओं ने जताया था आक्रोश
दूदू के मौजमाबाद में डिप्टी CM प्रेमचंद बैरवा (Prem Chand Bairwa) की चौपाल में साधुओं ने भैराणा धाम क्षेत्र में प्रस्तावित RIICO विस्तार पर आक्रोश जताया था। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। उनका कहना है कि वो इसी जमीन पर जिंदा समाधि कल ले लेंगे। यहां पर जमीन चिह्नित करके गड्ढे खोदे गए हैं।
अधिकारियों को दिए त्वरित समाधान के निर्देश
वहीं जनसुनवाई के दौरान डिप्टी CM प्रेमचंद बैरवा ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को जनता की समस्याओं का तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार गांव स्तर पर पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनने और उनका समाधान करने की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को लापरवाही नहीं बरतने की चेतावनी देते हुए कहा कि आमजन को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें, यह सुनिश्चित किया जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार का फोकस
बता दें कि राजस्थान सरकार इन दिनों ग्रामीण इलाकों में जनसुनवाई और चौपाल कार्यक्रमों के जरिए प्रशासनिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसी रणनीति के तहत उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा लगातार अपने विधानसभा क्षेत्र और आसपास के इलाकों का दौरा कर रहे हैं।
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