सरकार बने अभी महीना भी नहीं हुआ... और विजय थलपति पर उठा भ्रष्टाचार का पहला आरोप!

Thalapathy Vijay Corruption Allegation: तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय थलपति को सरकार संभाले हुए महीना भर भी नहीं बीता कि उनके ऊपर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लग गया है। मुख्य विपक्षी दल DMK ने आरोप लगाया कि एक विशेष कंपनी/ ठेकेदार को फायदा पहुँचाने के लिए टेंडर की प्रक्रिया में ही हेरफेर कर दी गयी और सिर्फ 6 घंटों में ही टेंडर के लिए एप्लीकेशन को बंद कर दिया गया।
दरअसल, 19 मई को तमिलनाडु के ग्रामीण विकास विभाग ने कांचीपुरम में 30,000 लीटर की क्षमता वाली एक ऊंची पानी की टंकी के निर्माण के लिए एक टेंडर जारी किया था। इस टेंडर की अनुमानित लागत 16 लाख 83 हजार रुपये थी। लेकिन इस टेंडर के लिए कंपनियों द्वारा बोली लगाने के लिए बहुत की कम समय दिया।
आरोप है कि विभाग ने सुबह 9 बजे टेंडर तो जारी कर दिया, लेकिन दोपहर 3 बजे ही आवेदन बंद कर दिए। यानी बोलीदाताओं को टेंडर भरने के लिए सिर्फ छह घंटे का वक़्त मिला। टेंडर दस्तावेज़ों के अनुसार, 19 मई को ही शाम 4 बजे टेंडर को खोला जाना था।
DMK के प्रदेश उपाध्यक्ष अमुथरासन ने कहा कि इतने कम समय में किसी भी कंपनी के लिए एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करना और जरूरी कार्यवाही पूरी करना मुमकिन नहीं है। ये किसी खास कंपनी को फायदा पहुँचाने के लिए किया गया है। यह ठेका सोची समझी राजनीति है। साथ ही, विपक्ष ने इस प्रक्रिया को Tamil Nadu Transparency in Tenders Act का उल्लंघन बताया।
विवाद तब और बढ़ा जब मामले से जुडी तस्वीरें और स्क्रीनशॉट्स सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। टेंडर की डिटेल्स वायरल हुई, लोगों ने सवाल उठाए, और विवाद बढ़ने पर अगले दिन थलपति विजय सरकार ने टेंडर ही रद्द कर दिया। साथ ही संबंधित कार्यकारी अभियंता को भी निलंबित कर दिया।
बता दें कि ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री एन. आनंद ने ठीक एक दिन पहले ही इस विभाग की जिम्मेदारी संभाली थी। विपक्ष ने उंगली उठाई और कहा कि नई सरकार अभी ठीक से कामकाज शुरू भी नहीं कर पाई है और ठेकों में पारदर्शिता पर सवाल खड़े होने लग गए हैं।
हालाँकि, TVK सरकार ने आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए टेंडर रद्द किया गया है और मामले में आगे जांच की जा रही है।
इस लिंक को शेयर करें

