Naresh Meena And Tina Dabi: ऐसा क्या हुआ कि आधे घंटे में ही टीना डाबी के मुरीद हो गए नरेश मीणा, धरना तक छोड़ दिया

Tonk: जिस बात का अंदेशा लगाया जा रहा था, वही हुआ। देश की सबसे चर्चित IAS अधिकारी टीना डाबी ने जब टोंक कलेक्ट्रेट की कमान संभाली थी, तभी से ये बातें शुरू हो गईं थीं कि नरेश मीणा से इनकी खटपट जरूर होगी, जो कि हो गई है। लेकिन कहानी में थोड़ा ट्विस्ट है, यहां खटपट नहीं बल्कि यहां तो नरेश मीणा टीना डाबी के मुरीद होते दिख रहे हैं।
टीना डाबी से नरेश मीणा की बातचीत
दरअसल जिले में बढ़ती पेयजल किल्लत के विरोध में मंगलवार से शुरू होने वाला धरना नरेश मीणा ने स्थगित कर दिया। उन्होंने ये फैसला जिला कलेक्टर टीना डाबी (Tina Dabi) के आश्वासन के बाद लिया गया। टीना डाबी ने जल आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने और समाधान के लिए ठोस कदम उठाने का भरोसा दिलाया।
नरेश मीणा बीते सोमवार को टोंक कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर से पेयजल संकट, ग्रामीण इलाकों में पानी की नियमित आपूर्ति और दूसरी स्थानीय मांगों को लेकर लंबी बातचीत की। जिसके बाद कलेक्टर की तरफ से समस्याओं की दूर करने के लिए समीक्षा करने और जरूरी संसाधन तैनात करने का वादा मिलने के बाद उन्होंने धरना फिलहाल रोकने का फैसला लिया है लेकिन अगर 7 दिनों के भीतर समाधान नहीं होता तो वे धरने पर बैठ जाएंगे।
टीना डाबी ने जारी किए 60 लाख रुपए
इधर टीना डाबी ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत अभी तक कोई बजट जारी नहीं हुआ है। इसलिए कई ठेकेदारों ने काम रोककर रखा हुआ है। लेकिन अभी गर्मी से हालात ज्यादा खराब हैं इसलिए प्रशासन ने पेयजल के लिए 60 लाख रुपये जारी कर दिए हैं। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाए जाएं और पानी की समस्याओं के समाधान के लिए एक रोडमैप तैयार किया जाए। प्रशासन का कहना है कि जल संरक्षण योजनाओं और टोंक के मौजूदा जल बुनियादी ढांचे को सुधारने पर भी फोकस किया जाएगा।
गर्मी से पानी की भीषण कमी
बता दें कि पहले से ही गर्मी और कम बारिश के चलते पीने के पानी की कमी बढ़ गई थी, जिससे गांवों में टैंकर्स और सरकारी सप्लाई के लिए दबाव बना हुआ था। इलाके में लंबे समय से पेयजल परियोजनाओं और पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार की मांग उठ रही थी, लेकिन इस तरफ कोई काम नहीं हुआ था, ऐसे में जनता में नाराज़गी थी।
दरअसल, नरेश मीणा ने धरना शुरू करने की घोषणा तब की थी जब देवली-उनियारा क्षेत्र के ग्रामीणों ने कई दिनों तक पानी की कमी का सामना किया और सरकार से समाधान की मांग तेज़ कर दी। ये मुद्दे पिछले कुछ समय से प्रशासन की सुस्ती का कारण बने हुए थे, जिसके चलते आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई थी। उन्होंने मीडिया से कहा कि टोंक खुद जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी का गृह क्षेत्र है फिर भी यहां पर पानी की इतनी समस्या है और इस तरह कोई ध्यान भी नहीं दिया जा रहा है। साथ ही ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर यहां के प्रभारी मंत्री है फिर भी हालात बद से बदतर हैं। गांव वालों को टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है।बीसलपुर बांध के चलते कई गांव विस्थापित हुए, जबकि इसी बांध से जयपुर जैसे जिलों को पानी पहुंचाया जा रहा है, और टोंक प्यासा रह गया है।
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