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Friendship Day Special: राजस्थान के नेताओं की सबसे गहरी दोस्ती, सचिन पायलट से किरोड़ी मीणा तक कौन है किसका सबसे बड़ा यार?

Friendship Day Special: राजस्थान के नेताओं की सबसे गहरी दोस्ती, सचिन पायलट से किरोड़ी मीणा तक कौन है किसका सबसे बड़ा यार?
आर्टिकल
01 Aug 2026, 04:32 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

दोस्ती, एक ऐसा रिश्ता है जो राजनीति से भी बड़ा हो सकता है। राजनीति में लोग जहां आज दोस्त और कल विरोधी बन जाते हैं, वहीं राजस्थान की सियासत में दोस्ती की कुछ ऐसी कहानियां भी हैं, जो सत्ता-पार्टी बदलने के बाद भी नहीं बदली। फ्रेंडशिप डे स्पेशल में राजस्थान के उन नेताओं की हम बात कर रहे हैं जिनकी दोस्ती सिर्फ फोटो तक सीमित नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त की कसौटी पर भी खरी उतरी।

किरोड़ी मीणा की कृष्ण-सुदामा की दोस्ती!

अगर राजस्थान की राजनीति में दोस्ती की सबसे चर्चित कहानी की बात करें तो नाम आता है प्रदेश के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा का। उनकी दोस्ती की कहानी किसी फिल्म कहानी से कम नहीं है। उनके सबसे पुराने मित्र हैं...नारायण मोदी। किरोड़ी लाल मीणा जब बीकानेर के सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे। तब ये दोस्ती शुरु हुई थी जो आज करीब पांच दशक बाद भी कायम है। 1975 में देश में आपातकाल के दौरान जब किरोड़ी लाल मीणा पुलिस से बचते हुए छिप रहे थे तब नारायण मोदी, जो उस समय टैक्सी चलाते थे, उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर उनकी मदद की।

हाल ही में जब किरोड़ी लाल मीणा अपने पुराने दोस्त से मिलने बीकानेर पहुंचे तो दोनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं। सोशल मीडिया पर तो लोगों ने इस दोस्ती को कृष्ण और सुदामा जैसी दोस्ती बताया।

सचिन पायलट का दोस्त कौन?

अगर राजस्थान की राजनीति में दोस्ती की सबसे चर्चित कहानी की बात करें तो नाम आता है सचिन पायलट का। साल 2020 जब मानेसर मामले के दौरान कांग्रेस में सबसे बड़ा सियासी संकट आया था, तब कई विधायक सचिन पायलट के साथ खड़े नजर आए। इनमें प्रमुख नाम थे रमेश मीणा, विश्वेंद्र सिंह, मुरारी लाल मीणा, वेदप्रकाश सोलंकी, गजेंद्र सिंह शक्तावत, सुरेश मोदी, इंदिरा मीणा, दानिश अबरार और रोहित बोहरा। इन नेताओं ने उस समय पायलट का खुलकर साथ दिया और ये राजस्थान की राजनीति के सबसे चर्चित राजनीतिक समूहों में शामिल हो गया।

ज्योतिरादित्य सिंधिया सबसे पक्के दोस्त

पायलट की दोस्ती सिर्फ कांग्रेस तक सीमित नहीं है। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया उनके सबसे करीबी दोस्तों में गिने जाते हैं। दोनों की दोस्ती छात्र जीवन से चली आ रही है। दिलचस्प बात ये है कि सिंधिया कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में चले गए, लेकिन दोनों नेताओं के व्यक्तिगत रिश्तों पर इसका असर सार्वजनिक तौर पर नहीं दिखा। और अगर सचिन पायलट से पूछा जाए कि उनका सबसे अच्छा दोस्त कौन था तो उनका जवाब अक्सर होता है..."मेरे पिता राजेश पायलट।" दरअसल कई इंटरव्यू में उन्होंने कहा है कि उनके पिता सिर्फ पिता नहीं, बल्कि उनके सबसे अच्छे दोस्त थे जिसे अब वो खो चुके हैं।

अशोक गहलोत की दोस्ती

अब बात करते हैं राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की। गहलोत के सबसे पुराने दोस्तों में सबसे प्रमुख नाम है रामेश्वर दाधीच। वे बीजेपी के नेता हैं और जोधपुर के पूर्व मेयर हैं। दोस्ती की बानगी तो देखिए कि दोनों नेता विरोध दल के हैं लेकिन इनकी दोस्ती आज भी उतनी ही पक्की है, जितनी कि पहले, रामेश्वर की चर्चा अक्सर अशोक गहलोत के हूबहू दिखने के लिए की जाती है। बताया जाता है कि दोनों बचपन से एक-दूसरे के मित्र रहे हैं और आज भी यह रिश्ता कायम है।

कौन है गहलोत के सियासी दोस्त

वहीं अशोक गहलोत की राजनीतिक दोस्तों की बात करें तो तीन नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहते हैं- महेश जोशी, शांति धारीवाल और सीपी जोशी। ये वही नेता हैं जिनका नाम 25 सितंबर 2022 के कांग्रेस संकट में सबसे ज्यादा सामने आया था। जब अशोक गहलोत को कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा थी, तब गहलोत समर्थक विधायक उनके राजस्थान छोड़ने के खिलाफ खड़े हो गए। सीपी जोशी के आवास पर बैठकों का दौर चला और बाद की घटनाओं ने पूरे देश की राजनीति का ध्यान राजस्थान की ओर खींच लिया।

बेनीवाल की दोस्ती

अब बात राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी RLP के प्रमुख हनुमान बेनीवाल की। अगर बेनीवाल के सबसे भरोसेमंद साथी की बात करें तो वह कोई राजनीतिक नेता नहीं बल्कि उनके अपने छोटे भाई नारायण बेनीवाल हैं। चाहे कोई राजनीतिक संघर्ष हो, कोई आंदोलन हो, कोई चुनाव हो... नारायण बेनीवाल लगभग हर मोर्चे पर उनके साथ दिखाई देते हैं। वहीं एक समय उम्मेदाराम बेनीवाल भी उनके बेहद करीबी माने जाते थे। लेकिन कांग्रेस में शामिल होने के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी आ गई।

ये दोस्ती हमें सिखाती है कि राजनीति में चाहे गठबंधन बदलें, सरकारें बदलें, विचारधाराएं भी बदलें लेकिन दोस्ती का रिश्ता सत्ता और विपक्ष से ऊपर होता है फिर चाहे वो सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया की दोस्ती हो, अशोक गहलोत और रामेश्वर दाधीच का साथ हो, हनुमान बेनीवाल और उनके भाई नारायण बेनीवाल का भरोसा हो या किरोड़ी लाल मीणा व नारायण मोदी की आधी सदी पुरानी मित्रता। ये बताती हैं कि राजनीति में भी दोस्ती की मिसालें आज भी जिंदा हैं।

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