क्यों बढ़ता जा रहा है वर्कप्लेस पर मेंटल हेल्थ का महत्व? अपनी मेंटल हेल्थ बेहतर करने के 5 आसान तरीके

How to Improve Mental Health at Workplace: आज की तेज़, डिजिटल और कॉम्पिटिटिव दुनिया में ऑफिस का काम ही सिर्फ ज़रूरी नहीं रहा, बल्कि हमारी आइडेंटिटी, सेल्फ रेस्पेक्ट और सोशल स्टेटस भी जरूरी हिस्सा बन चुका है। ऐसे में वर्कप्लेस पर मेंटल हेल्थ की इम्पोर्टेंस पहले से ज्यादा बढ़ गयी है। बढ़ते कम्पटीशन, गोल पूरे करने का प्रेशर, टाइम लिमिट, डिजिटल ओवरलोड और लगातार ऑफिस के बदलते माहौल ने एम्प्लोई के मेंटल हेल्थ को चुनौती दी है। इसलिए वर्कप्लेस पर Mental Health पर खुलकर चर्चा करना और उसे Priority देना इस समय की जरूरत बन गई है।
• आज ज्यादातर वर्कर्स “Always Available” रहने के कल्चर में काम कर रहे हैं। ईमेल, मैसेज और ऑनलाइन मीटिंग्स ने काम और पर्सनल लाइफ की लिमिट्स को ख़त्म कर दिया है। इसकी वजह से बर्नआउट, थकान, चिड़चिड़ापन और फोकस में कमी जैसी समस्याएँ आम हो गई हैं। अगर इन संकेतों को समय पर नहीं समझा गया, तो यह स्ट्रेस, टेंशन, डिप्रेशन और सीरियस मेंटल प्रोब्लम्स का रूप ले सकते हैं। (Burnout Prevention)
• एक हेल्थी मेंटल स्टेट वाला वर्कर क्रिएटिविटी, डिसिज़न मेकिंग और टीमवर्क को बेहतर बनाता है। जब व्यक्ति मेंटली बैलेंस्ड होता है, तो वह ज्यादा बेहतर तरीके से सोच पाता है, ज्यादा अच्छे से Problem Solve कर पाता है और कंपनी के गोल्स में अच्छा कॉन्ट्रिब्यूशन देता है। इसके उलट, अगर हम इस पर ध्यान ना दें, तो लगातार स्ट्रेस होने से प्रोडक्टिविटी कम होती है और गलती होने की संभावना बढ़ जाती है। (Digital Overload)
• जहाँ मेंटल स्टेट को इम्पोर्टेंस दी जाती है, वहाँ लोगों में बातचीत ज्यादा गहरी और solution based होती है। वर्कर बिना डर के अपनी दिक्कतें बता पाते हैं। इससे भरोसा बढ़ता है और टीम के भीतर सहयोग की भावना बढ़ती होती है। एक सेंसिटिव लीडरशिप और हेल्पफुल माहौल वर्कप्लेस को सुरक्षित और आइडियल बनाता है, जिससे पॉजिटिव वर्क कल्चर बनता है।
• आज की यंग जनरेशन सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि ऑफिस का माहौल भी देखती है। अगर कंपनी मेंटल हेल्थ का ध्यान रखती है- जैसे फ्लेक्सिबल वर्किंग आवर्स, काउंसलिंग हेल्प, ब्रेक कल्चर और वर्क-लाइफ बैलेंस, तो वर्कर भी लंबे समय तक जुड़े रहना पसंद करते हैं। इससे कंपनी की इमेज भी बेहतर बनती है और टैलेंटेड वर्कर्स भी काम छोड़ कर नहीं जाते हैं। (Work Life Balance)
• मेंटल हेल्थ सिर्फ एक “एचआर पॉलिसी (HR Policy)” नहीं, बल्कि ह्यूमन सेंसिटिविटी का टॉपिक है। हर वर्कर अपनी पर्सनल लाइफ की चुनौतियों के साथ ऑफिस आता है। यदि कंपनी अंडरस्टैंडिंग और Sympathy दिखाती है, तो कंपनी को न सिर्फ इसके बेहतर रिजल्ट मिलते हैं, बल्कि वह एक Responsible Social Unit भी बनाती है।
• वर्कस्पेस में मेंटल हेल्थ को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए कुछ इम्पोर्टेन्ट स्टेप उठाए जा सकते हैं:-
• मेंटल हेल्थ अवेयरनेस के लिए वर्कशॉप और रेगुलर इवेंट होने चाहिए। (Mental Health Workshop)
• ओपन-डोर पॉलिसी (ODP) और सेफ कम्युनिकेशन का माहौल बनाये रखना चाहिए।
• वर्क प्रेशर का डिस्ट्रीब्यूशन बैलेंस्ड होना चाहिए।
• ब्रेक और हॉलिडे समय-समय पर मिलते रहना चाहिए।
• टाइम-टू-टाइम ऑफिस में प्रोफेशनल मेंटल हेल्थ काउंसलिंग होनी चाहिए।
वर्कस्पेस में मेंटल हेल्थ की ज़रुरत सिर्फ वर्कर्स की भलाई तक ही सीमित नहीं है, यह कंपनी के अच्छे फ्यूचर से भी जुड़ा हुआ है। एक मेंटली हेल्थी वर्कर ही क्रिएटिव, डेडिकेटेड और बैलेंस्ड कॉन्ट्रिब्यूशन दे सकता है। इसलिए आज ज़रूरी है कि हम वर्कप्लेस पर मेंटल हेल्थ को एक ऑप्शनल सब्जेक्ट की तरह नहीं, बल्कि पहली ज़िम्मेदारी की तरह देखें।
जब ऑफिस का माहौल अंडरस्टैंडिंग, हेल्पफुलनेस और रेस्पेक्ट को पहले रखेगा, तभी सही मायनों में ग्रोथ हो पाएगी - व्यक्ति की भी और कंपनी की भी।
Content : Kriti Kumari
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