पंचायती राज दिवस: राजस्थान समेत 8 राज्यों की डेडलाइन गुजरी, जानिए कहां और कब हुआ पहला चुनाव

पंचायती राज दिवस: राजस्थान समेत 8 राज्यों की डेडलाइन गुजरी, जानिए कहां और कब हुआ पहला चुनाव
राजस्थान
24 Apr 2026, 02:08 pm
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

Panchayat Election: 24 अप्रैल यानी आज पंचायत दिवस है। भारत एक गांवों का देश है। यहां की जीवन गांवों में ही बसता है। इसमें लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए ग्राम पंचायतों का कॉन्सेप्ट लाया गया जिससे गांव की सरकारें मजबूत हों। लोकतंत्र का पूरा फायदा देश के लोगों को मिले। वहीं संविधान में हर पांच साल में पंचायती राज व्यवस्था को लागू हुए 33 साल हो चुके हैं। बात अगर पंचायती राज की हो रही है तो राजस्थान का नाम लेना तो बहुत जरूरी है क्योंकि पंचायत चुनाव को लेकर तो राजस्थान में बवाल मचा हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट ने दी थी 15 अप्रैल की डेडलाइन

दरअसल राजस्थान में पंचायत चुनाव कराने की सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन निकल चुकी है जो कि 15 अप्रैल थी अब राजस्थान में चुनाव (Panchayat Diwas) कब होंगे ये अभी तक नहीं पता लेकिन सूत्रों के मुताबिक ये चुनाव इस साल तो होने से रहे ये सीधे अब 2027 में खिसक गए हैं। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यहां आपको एक बात बताना और जरूरी है कि केंद्र सरकार ने इसी साल मार्च में लोकसभा में ये बताया था कि 8 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में पंचायत चुनाव की डेडलाइन निकल चुकी है। कई जगह तो चुनाव 4 से 5 साल पहले ही लेट हो चुके हैं। जिसमें राजस्थान भी शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट ने जब 15 अप्रैल की डेडलाइन राजस्थान को दी थी तब ये कहा था कि 5 साल पूरे होने से पहले चुनाव होना जरूरी है अगर ये नहीं हुआ तो ये अंसवैधानिक माना जाएगा। दूसरी तरफ राजस्थान में पंचायत चुनाव की डेट आगे बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट में अपील दायर की है। वहीं कांग्रेस ने तो इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करार दिया है। हालांकि जनता को इस राजनीति में नहीं बल्कि ये बात जानने में दिलचस्पी है कि आखिर ये पंचायत निकाय चुनाव होंगे तो होगे कब?

राजस्थान में ही रखी गई थी पंचायत चुनाव की नींव

क्या आप ये जानते हैं कि जिन पंचायत चुनाव के लिए राजस्थान में इतना हंगामा मचा है उस चुनाव की पहली ईंट कहां रखी गई थी? तो बता दें कि ये बात आज की नहीं, बल्कि 67 साल पुरानी है। 2 अक्टूबर 1959 के दिन गांधी जयंती मनाई जा रही थी। इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू नागौर पहुंचे थे। इन्होंने यहां के के बगदरी गांव में पंचायती राज व्यवस्था की नींव रखी थी। त्रि-स्तरीय व्यवस्था—यानी ग्राम, तालुका और जिला—का ये मॉडल यहीं से पूरे देश में फैलना शुरू हुआ था।

ये भी पढ़ें- कांग्रेस की अपील तक को कोर्ट ने किया था खारिज, पंचायत चुनाव पर गहलोत ने की BJP की घेराबंदी

इसके लिए देश में सबसे पहले 1952 में सामुदायिक विकास कार्यक्रम की शुरुआत हुई। फिर जनवरी 1957 में तब की भारत सरकार ने इस कार्यक्रम के लिए एक समिति का गठन किया। जिसका काम सामुदायिक विकास कार्यक्रम और राष्ट्रीय विस्तार सेवा के कार्यों की जांच और बेहतर सुझाव देना था। इस समिति के अध्यक्ष बलवंत राय मेहता थे। अशोक मेहता समिति फिर 1957 में समिति ने नवंबर में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। जिसके बाद लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की सिफारिश की। यही अपने आखिरी रुप में पंचायती राज के तौर पर स्थापित हुआ।

भारत में पुराना है पंचायती राज का कॉन्सेप्ट

वैसे तो भारत में पंचायत कोई नई चीज़ नहीं है। भारत में वेदों और प्राचीन ग्रंथों में भी 'सभा' और 'समिति' का ज़िक्र मिलता है। चोल साम्राज्य से लेकर विजयनगर तक, गांव अपने फैसले खुद लेते थे। लेकिन अंग्रेज़ों के दौर में ये व्यवस्था कमज़ोर पड़ गई। आज़ादी के बाद, बलवंत राय मेहता कमेटी की सिफारिशों ने इसे फिर से जिंदा किया।

1992 में बना संवैधानिक कानून

1959 में नागौर से शुरू हुआ ये सफर आगे चलकर 1992 में 73वें संविधान संशोधन के ज़रिए एक संवैधानिक कानून बन गया। आज आप सभी जिस पंचायत को देखते हैं, जिसके पास अपना बजट है, अपनी शक्तियां हैं, वो इसी का नतीजा है।

आज क्यों मनाया जा रहा है पंचायती राज दिवस

दरअसल भारतीय संविधान के पैराग्राफ 246 के जरिए स्थानीय सरकारों से संबंधितकिसी भी मामले में कानून बनाने का अधिकार राज्य विधानमंडल को सौंपा गया है। इसे संविधान के 73वें संसोधन के बाद 24 अप्रैल 1993 को पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देकर लागू किया गया। इसके बाद 24 अप्रैल 2010 को पहला पंचायती राज दिवस मनाया गया। तब से लेकर अब हर साल 24 अप्रैल को पंचायती राज दिवस मनाया जाता है।

ये भी पढ़ें- इस साल नहीं होंगे पंचायत चुनाव! मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बताया क्यों हुई चुनावों में देरी


इस लिंक को शेयर करें

ads

लेटेस्ट खबरें

ads
© 2025 Bharat Raftar. All rights reserved. Powered By Zentek.