राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों के बीजेपी के विलय को राज्यसभा सभापति ने दी मंजूरी

Raghav Chaddha: आप से बागी हुए राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों को राहत मिली है। राज्यसभा सभापति और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने इनके बीजेपी में विलय को मंजूरी दे दी है। इसके लिए राज्यसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर दी है।
राज्यसभा में अब बीजेपी के 113 सांसद
राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद अब बीजेपी की इस उच्च सदन में संख्या 113 हो गई है। अब आम आदमी पार्टी के सदन में सिर्फ 3 ही सांसद रह गए हैं। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी के उस चिट्ठी को भी झटका लगा है जिसमें उन्होंने सभापति से राघव चड्ढा पर कार्रवाई करने की मांग की थी। आप ने ये तर्क दिया था कि राघव चड्ढा ने एंटी डिफेक्शन लॉ का उल्लंघन कर बीजेपी ज्वाइन की है। यानी उन्हें राघव चड्ढा को अयोग्य साबित करना था कि उनके पास पार्टी के दो तिहाई सांसदों का समर्थन नहीं है।
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अयोग्य घोषित होने पर क्या होता?
आम आदमी पार्टी (Aam Admi Party) सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है ताकि 3 सांसदों की अयोग्यता के लिए दबाव बनाया जा सके। आप पार्टी ने राज्यसभा के सभापति को एक लेटर भी भेजा था। लेकिन अब तो राज्यसभा सचिवालय ने इसे मंजूरी दे दी है। इस लेटर में 10वीं अनुसूची का हवाला दिया जा रहा है। इसी 10वीं अनुसूची यानी दल-बदल कानून के आधार पर ही आम आदमी पार्टी कह रही है कि राघव चढ्डा और उनके साथ 7 सांसदों का जाना अवैध है।
अगर राघव चड्ढा इस 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित हो जाते, यानी वो ये साबित नहीं कर पाते कि उनके साथ पार्टी के दो तिहाई सदस्य यानी 6 सांसद हैं तो उनकी सदन की सदस्यता जा सकती थी। लेकिन राघव चड्ढा के साथ ऐसा नहीं होता क्योंकि ये नियम लोकसभा और विधानसभाओं में ही लागू होता है, राज्यसभा में नहीं। यानी वे अयोग्य होने के बाद भी सांसद बने रहते। पहले वो लेटर जिसमें सातों सांसदों के साइन हैं वो सार्वजनिक नहीं किया गया था और सिर्फ 3 सांसदों ने ही सार्वजनिक तरीके से आप छोड़ने की ऐलान किया था।
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