Rajendra Rathore: राजेंद्र राठौड़ का क्या था ‘भवानीपुर प्लान’? खुद किया खुलासा

West Bengal Bhabanipur seat: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट भवानीपुर पर बीजेपी के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगभग 15,000 वोटों के अंतर से हरा कर राजनीतिक इतिहास लिखा। इस जीत में राजस्थान बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ की भूमिका काफी निर्णायक रही, जिसकी चौतरफा तारीफ हो रही है। राजेंद्र राठौड़ ने ही भवानीपुर विधानसक्षा क्षेत्र में पार्टी की रणनीतिक रुपरेखा और ग्राउंड-लेवल अभियान की कमान संभाली थी। ऐसे में हर कोई उनकी रणनीति जानना चाह रहा है कि आखिर राजस्थान के दिग्गज ने पश्चिम बंगाल में ऐसा कौन सा जादू चलाया जिसने ये कमाल कर दिया। तो खुद अब राजेंद्र राठौड़ ने अपनी रणनीति का खुलासा कर दिया है।
राजेंद्र राठौड़ का ‘भवानीपुर प्लान’
दरअसल एक मीडिया इंटरव्यू में राजेंद्र राठौड़ ने अपनी प्लानिंग का खुलासा किया। उसमें उन्होंने उन बिंदुओं के बारे में बात की, जिससे इस सीट पर जीत मिली। राठौड़ की लीडरशिप में गठित टीम ने बूथ-स्तर पर संगठन और टारगेट वोटर इंगेजमेंटपर जोर दिया, जिससे स्थानीय वोटर्स के बीच बदलाव की लहर पैदा हुई।
राजेंद्र राठौड़ ने बताया कि उन्होंने इलाके में बूथ-बूथ पर माइक्रो-मैनेजमेंट लागू किया। हर वार्ड, गली और शक्ति-बिंदु के लिए अलग अभियान और योजनाएं बनाईं। स्थानीय कार्यकर्ताओं को लोगों से सहजता के साथ संपर्क करने को ट्रेन किया।
सबसे अहम- डर का माहौल तोड़ा
राठौड़ ने कहा कि पहले लोगों के मन में डर और दबाव था, जिससे वे खुलकर अपनी बात नहीं रख पा रहे थे, खासकर इसलिए क्योंकि ये सीट TMC की मुखिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की थी। ऐसे में बीजेपी की रणनीति का पहला टारगेट ये डर खत्म करना था ताकि वोटर बिना डर और दबाव के बाहर निकले और वोट डाल सके।
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हिंदी-भाषी और मारवाड़ी वोटबैंक पर फोकस
भवानीपुर को ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता है। क्योंकि यहां कई भाषाई समूह के लोग रहते हैं जैसे- गुजराती, राजस्थानी और हिंदी-भाषी समुदाय। ऐसे में इन्हें इस सीट पर बेहद निर्णायक माना जाता है। राठौड़ ने कहा कि बीजेपी ने इन समुदायों तक पहुंच मजबूत की और स्थानीय मुद्दों पर संवाद बढ़ाया।
स्थानीय विकास और सवाल
राठौड़ ने ये भी कहा कि पार्टी ने लोगों से पूछा कि इस इलाके में TMC के शासन में सड़क, नाली और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए क्या हुआ। जिस पर लोगों ने अपनी व्यथा बताई। इस असंतोष को बीजेपी ने मतदाता संवाद का केंद्र बनाया। वहीं राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि ये जीत कार्यकर्ताओं और जनता की मेहनत का नतीजा है और इसे संगठन की मजबूती से जोड़ा जाना चाहिए।
शुभेंदु की छवि भी अहम
शुभेंदु अधिकारी की गरीब-समर्थक, बेबाक नेता की छवि को चुनाव अभियान में प्रमुखता दी गई, जिससे वोटर्स के बीच समर्थन की भावना बढ़ी। सबसे अहम बात तो ये कि राजेंद्र राठौड़ की इस मेहनत पर खुद शुभेंदु अधिकारी ने मुहर लगा दी। जब जीत के बाद उन्होंने राजेंद्र राठौड़ और राजस्थान के आठों नेताओं को धन्यवाद दिया और कहा कि राजेंद्र राठौड़ के नेतृत्व में इन्होंने चुनाव के हर चरण में अहम भूमिका निभाई।
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