राजेंद्र राठौड़ ने ढहाई ममता बनर्जी की अजेय सीट, क्या राजस्थान या दिल्ली से मिलने वाला है कोई ‘गिफ्ट’?

Rajendra Rathore: बंगाल में आज एक नया सूरज उगा है। ममता बनर्जी का 15 साल का किला ढह चुका है और बीजेपी ने पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता की चाबी हासिल कर ली है। लेकिन इस जीत के पीछे एक ऐसा नाम है जिसकी चर्चा जयपुर से लेकर कोलकाता तक हो रही है। वो नाम है- राजेंद्र राठौड़।
शुभेंदु ने राजेंद्र राठौड़ का जताया आभार
जीत के तुरंत बाद शुभेंदु अधिकारी जब मीडिया के सामने आए, तो उनके शब्दों में राजस्थान के नेताओं के प्रति आभार साफ झलक रहा था। सुवेंदु ने खुले मंच से कहा की मैं खास तौर पर राजस्थान के राजेंद्र राठौड़ को धन्यवाद करना चाहता हूं। सुवेंदु ने कहा कि मैं राजस्थान के उन 8 नेताओं को प्रणाम करता हूं जिन्होंने राजेंद्र राठौड़ के नेतृत्व में मेरे लिए काम किया। इसके अलावा उन्होंने गुजरात के आए सहयोगी अशोक और सिख समाज का भी आभार जताया।
भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को शुभेंदु ने दी पटखनी
बता दें कि भवानीपुर सीट ममता बनर्जी का अपना घर मानी जाती थी। लेकिन यहां सुवेंदु अधिकारी की जीत और ममता की हार के पीछे राजस्थान के दिग्गज नेता राजेंद्र राठौड़ का 'माइक्रो-मैनेजमेंट' था। राठौड़ ने करीब दो महीने तक भवानीपुर में डेरा डाला और यहाँ मारवाड़ी और हिंदी भाषी वोटर्स निर्णायक थे। राठौड़ ने 'बूथ जीतो, चुनाव जीतो' के मंत्र पर काम किया।
शुभेंदु अधिकारी को भवानीपुर से लड़ने को अमित शाह ने कहा
एक दिलचस्प खुलासा यह भी हुआ कि शुभेंदु अधिकारी पहले भवानीपुर से लड़ने को तैयार नहीं थे। लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें नंदीग्राम के साथ-साथ भवानीपुर में भी ममता को उनके घर में घुसकर हराने की चुनौती दी। इस बात का खुलासा खुद अमित शाह ने भवानीपुर सीट पर चुनावी रैली के दौरान किया था। उन्होंने कहा था हमारे शुभेंदु दा नंदीग्राम से ही चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन मैंने कहा था कि केवल नंदीग्राम से नहीं बल्कि ममता बनर्जी के घर में जाकर हराना है। इसके अलावा कल काउंटिंग के हर राउंड के दौरान शाह खुद सुवेंदु से फोन पर अपडेट ले रहे थे।
जहां बंगाल में बीजेपी ने इतिहास रचा, वहीं केरल में कांग्रेस की एकतरफा जीत हुई है। वहां भी राजस्थान का हाथ रहा। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने सीनियर ऑब्जर्वर के तौर पर केरल में मोर्चा संभाल रखा था। यानी राजस्थान के नेता आज देश की राजनीति की दिशा तय कर रहे हैं। बंगाल की ये जीत सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं है, बल्कि यह उन रणनीतिकारों की भी जीत है जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर बूथ स्तर पर लड़ाई लड़ी। राजेंद्र राठौड़, जिन्होंने अपनी हार का गम भुलाकर संगठन के लिए बंगाल फतह किया, आज बीजेपी के लिए 'मैन ऑफ द मैच' साबित हुए हैं।
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