2028 में बीजेपी सरकार को टक्कर देने को तैयार गहलोत-पायलट की जोड़ी, आखिर क्या पक रहा है अंदरखाने में

Rajasthan Politics: राजस्थान की सियासत में पिछले कुछ सालों से जो 'अघोषित युद्ध' चल रहा था, ऐसा लग रहा है कि उस पर पूर्णविराम लग गया है। हम ऐसा क्यों कह रहे हैं अब वो भी सुनिए। दरअसल कल दिल्ली के इंदिरा भवन से एक ऐसी तस्वीर सामने आई थी जिसने सबको चौंका दिया था। राजस्थान कांग्रेस के दो दिग्गज-एक तरफ अनुभवी 'जादूगर' अशोक गहलोत और दूसरी तरफ युवाओं की पसंद सचिन पायलट। जो नेता एक-दूसरे का नाम लेना पसंद नहीं करते थे, आज वो ना केवल साथ दिखे, बल्कि ठहाके लगाते और एक-दूसरे का हाथ थामे नजर आए।
राहुल गांधी की वजह दोनों एक साथ आए नजर
नजारा था कांग्रेस OBC परिषद की बैठक का, जिसे राहुल गांधी ने बुलाया था। जैसे ही अशोक गहलोत की गाड़ी रुकी, सचिन पायलट खुद आगे बढ़कर उनका स्वागत करने पहुंचे। दोनों के बीच गर्मजोशी ऐसी थी कि वहां मौजूद पत्रकार भी हैरान रह गए। तभी अशोक गहलोत ने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज में मीडिया से बोले कि 'भाई, फोटो खींच लो और संभाल कर रखना, वरना कल फिर कहोगे कि हमारे बीच बनती नहीं है! गहलोत की इस बात पर पायलट भी खिलखिला कर हंस पड़े। ये केवल एक मुलाकात नहीं थी, बल्कि राजस्थान से दिल्ली तक कार्यकर्ताओं को दिया गया एक बड़ा 'एकता' का संदेश था।
लेकिन सवाल ये है कि ये हृदय परिवर्तन अचानक हुआ कैसे? असल में, इस मिलन की पटकथा राहुल गांधी ने तैयार की थी। बैठक के भीतर राहुल गांधी का रुख बेहद सख्त और साफ था। उन्होंने देश और राज्यों के ओबीसी नेताओं को कड़ा संदेश दिया कि वे एकजुट हों, साथ बैठें और एक साझा राय बनाएं। राहुल गांधी ने साफ किया कि पार्टी अब 'व्यक्तिगत राजनीति' के बजाय 'मुद्दों की राजनीति' पर ध्यान देगी। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना की मांग अब एक राष्ट्रीय मिशन है और इसे अमली जामा पहनाने के लिए ओबीसी, दलितों और पिछड़ों को सत्ता में उनका वाजिब हक दिलाना ही प्राथमिकता है।
राहुल गांधी ने दिया के कड़क मैसेज
सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर नेताओं के विचार पार्टी स्टैंड से अलग हैं, तो वे इसे लिखित में दें, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर मतभेद नहीं दिखना चाहिए। शायद इसी 'क्लास' का असर था कि गहलोत और पायलट की दूरियां मिटती नजर आईं।
तो क्या ये सिर्फ पर्दे के पीछे कुछ और ही चल रहा है?
राहुल चाहते हैं कि राजस्थान के ये दो स्तंभ अब तलवारें खींचने के बजाय ओबीसी जनगणना और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर एक साथ होकर सरकार को घेरें। आज की इस मुलाकात ने उन तमाम अटकलों को फिलहाल शांत कर दिया है जो कांग्रेस में बिखराव की बात कर रही थीं। क्या गहलोत और पायलट की यह हंसी बरकरार रहेगी? क्या राजस्थान कांग्रेस का यह 'यूनाइटेड फेस' आने वाले चुनावों में गेमचेंजर साबित होगा? यह तो वक्त बताएगा, लेकिन आज की इन तस्वीरों ने यह जरूर साबित कर दिया कि राजनीति में असंभव कुछ भी नहीं है।
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