क्या RLP में जाएंगे छोटू सिंह रावणा, रविंद्र भाटी से टक्कर लेने के लिए थामेंगे बेनीवाल का हाथ

Chhotu Singh Rawana on Hanuman Beniwal: राजस्थान की राजनीति में कब कौन किसके पाले में खड़ा हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। हम बात कर रहे हैं मशहूर लोक कलाकार छोटू सिंह रावणा की। हाल ही में भाटी और रावणा के बीच हुई 'कंट्रोवर्सी' ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरी थीं। लेकिन अब इस विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। इसमें अब नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की एंट्री हो गई है।
रावणा ने बेनीवाल पर क्या कहा?
दरअसल, बिलाड़ा विधानसभा के भावी गांव में बाबा साहब अंबेडकर की 135वीं जयंती के मौके पर एक विशाल भजन संध्या का आयोजन किया गया था— 'एक शाम पीड़ित बिटिया के नाम'। इसी कार्यक्रम के दौरान जब एक पत्रकार ने छोटू सिंह रावणा से सवाल किया कि आपका 'पसंदीदा नेता' कौन है? तो रावणा ने बिना पलक झपकाए नाम लिया— हनुमान बेनीवाल! जब उनसे इसकी वजह पूछी गई, तो उन्होंने बड़े बेबाक अंदाज में कहा कि "हनुमान बेनीवाल किसी से डरते नहीं हैं, और जो डरता नहीं है, वही मुझे सबसे ज्यादा पसंद है।" अब सवाल यह उठता है कि क्या वाकई हनुमान बेनीवाल राजस्थान में 'न्याय के योद्धा' बन चुके हैं? या फिर वो 'हारे का सहारा' हैं?
रविंद्र भाटी से बचने को बेनीवाल का सहारा?
जानकार इस बयान के पीछे की कहानी सिर्फ 'पसंद' तक सीमित नहीं बताते। उनका कहना है कि रविंद्र सिंह भाटी के साथ हुए विवाद के बाद छोटू सिंह रावणा खुद को असुरक्षित या अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। क्या रावणा यह सोच रहे हैं कि अगर भविष्य में यह विवाद और गहराया या कानूनी पचड़ों में फंसा, तो हनुमान बेनीवाल जैसा दबंग नेता ही उनकी 'ढाल' बन सकता है? क्या बेनीवाल का समर्थन उन्हें वो 'सिक्योरिटी' प्रदान करेगा जिसकी उन्हें इस वक्त ज़रूरत महसूस हो रही है?
अब देखना यह होगा कि बेनीवाल इस 'खुले प्रेम' पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। क्या वो रावणा को अपनी टीम का हिस्सा बनाएंगे? अगर ऐसा होता है, तो मारवाड़ की राजनीति में समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे। कलाकार से नेता बनने का यह सफर रावणा के लिए कितना सुरक्षित रहेगा, यह तो वक्त बताएगा।
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