आखिर तय ही हो गई गरीब मजदूरों की जिंदगी की कीमत! दोनों मृतकों के परिजनों को मिलेंगे 55-55 लाख रुपए

Jaipur Seveg News: जयपुर सीवेज हादसे में मारे गए दो मजदूरों के परिजनों को अब 55-55 लाख रुपए का मुआवजा मिलेगा। वाल्मीकि समाज और सफाई कर्मचारियों के साथ प्रशासन के बीच ये सहमति बनी है। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास (Pratap Singh Khachariyavas) और टीकाराम जूली ने परिजनों के लिए 1-1 करोड़ रुपए का मुआवजा और मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी की मांग की थी। ये भी कहा था कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो कांग्रेस आंदोलन करेगी।
निवारू रोड के करधनी में बीते शुक्रवार दो सफाईकर्मियों अजय और रामबाबू की सफाई करने के लिए सीवेज मैनहोल में उतरने से मौत हो गई थी। जिसके बाद वाल्मीकि समाज में भारी नाराजगी देखने को मिली थी। संयुक्त वाल्मीकि एवं सफाई श्रमिक संघ, जयपुर शहर वाल्मीकि पंच कमेटी ने प्रशासन पर सीधे आरोप लगाए थे कि अधिकारियों की लापरवाही से ही मजदूरों की मौत हुई है। इसके बाद सफाईकर्मियों ने पूरे शहर में सफाई हड़ताल का ऐलान कर दिया था। जिससे साफ-सफाई नहीं हो रही थी। जिसके चलते नगर निगम प्रशासन ने समाज की मांगों को स्वीकार किया।
ऐसे मिलेंगे 55 लाख रुपए
समाज और प्रशासन के बीच जो सहमति बनी है उसके मुताबिक अजय और रामबाबू के आश्रित परिजनों को 55 लाख 25 हजार रुपए मुआवजे के रूप में मिलेंगे। इसके अलावा दोनों मजदूरों के परिजनों में से एक-एक को संविदा पर नौकरी दी जाएगी। साथ ही दोनों को एक-एक डेयरी बूथ भी दिया जाएगा। वहीं जो 55 लाख रुपए दिए जाएंगे, उसमें 30 लाख रुपए स्वायत्त शासन विभाग, 10 लाख रुपए नगर निगम, मुख्यमंत्री राहत कोष से 5 लाख, ठेकेदार से 1 लाख रुपए और सिविल लाइंस विधायक गोपाल शर्मा की तरफ से 25 हजार रुपए दिए जाएंगे।
बताया गया है कि इनमें तो 5-5 लाख रुपए शनिवार को वार्ता के बाद ही दे दिए गए। बाकी की रकम किश्तों में दी जाएगी। इसके अगले दिन यानी 19 अप्रैल तो 5-5 लाख रुपए और दिए जाएंगे फिर सोमवार को नगर निगम 10-10 लाख रुपए देगा। बाकी स्वायत्त शासन विभाग की तरफ से भी जल्द पैसे जारी किए जाएंगे हालांकि इसकी कोई तय तारीख नहीं बताई गई है।
कांग्रेस ने दी थी आंदोलन की चेतावनी
बता दें कि अजय और रामबाबू को बिना किसी सुरक्षा उपकरणों के मैनहोल में उतारा था। ये काम ठेकेदार ने दिया था। मैनहोल ही जहरीली गैस ने उनका दम घोंट दिया था। मजदूरों की मौत के बाद वाल्मीकि समाज और यूनियन के नेताओं ने सफाई से हड़ताल कर दी थी और कांवटिया अस्पताल में जोरदार हंगामा किया था। जिसके बाद प्रताप सिंह खाचरियावास, टीकाराम जूली और शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा अस्पताल पहुंचे थे। यहां उन्होंने लोगों से बातचीत की और मांगे ना मानने पर सरकार को आंदोलन की चेतावनी दी थी।
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