लो क्वालिटी का स्टील और नौसिखिया इंजीनियर...सामने आई पचपदरा रिफाइनरी में आग की वजह

Pachpadara Refinery Fire Incident Report: 20 अप्रैल को पचपदरा रिफाइनरी में लगी आग को लेकर शुरुआती जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। इसमें किसी साजिश, डिजिटल हैकिंग या ग्लोबल सेबोटाज का देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी NIA अब तक कोई सबूत नहीं मिला है। एक रिपोर्ट के मुताबिक NIA के एक अधिकारी ने बताया कि आग की वजह तकनीकी खामी और टेस्टिंग के दौरान की गई गंभीर लापरवाही ही सामने आ रही है।
जांच एजेंसी ने मैनुअल छेड़छाड़, ऑटोमैटिक सिस्टम फेल्योर और डिजिटल इंटरफेरेंस जैसे सभी पहलुओं की जांच की, लेकिन अब तक ऐसा कुछ नहीं मिला जो किसी साजिश की तरफ इशारा करे। इसके उलट, तकनीकी रिपोर्ट में रिफाइनरी के निर्माण स्तर पर कई बड़ी खामियां सामने आई हैं।
तकनीकी रिपोर्ट में सामने आए बड़े सवाल
1. सस्ती कार्बन स्टील लगाई गई, जबकि जरूरत थी एलॉय P-5 स्टील की
CDU यानी क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट की इनलेट लाइन में जिस P-5 एलॉय स्टील की जरूरत थी, उसकी जगह 3 से 4 गुना सस्ती कार्बन स्टील लगाई गई। जो इस हादसे का अहम कारण बनी। क्योंकि वैक्यूम रेजिड्यू बेहद गर्म होकर बहता है और तापमान 350–400°C तक पहुंचता है। ऐसे में कार्बन स्टील के कमजोर होने से गेज टैपिंग पॉइंट पर तेज धार में लीक होने लगा और हवा के संपर्क में आते ही आग भड़क उठी।

2. ऑटोमैटिक सेफ्टी वॉल्व मौके पर फेल हो गया
हादसे के समय लगा रिमोट ऑपरेटेड शट-ऑफ वॉल्व बिल्कुल काम नहीं आया। ये वॉल्व लीकेज का पता लगते ही खुद बंद हो जाना चाहिए था, ताकि पीछे से आ रहे हजारों लीटर वैक्यूम रेजिड्यू आग तक ना पहुंचे। लेकिन 20 अप्रैल को सिस्टम एक्टिव नहीं हुआ, और सप्लाई मैनुअली बंद करनी पड़ी। इसके अलावा स्प्रिंकलर और वॉटर रिग्स भी उम्मीद के मुताबिक काम नहीं करते दिखे।

3. हाइड्रो-टेस्टिंग में भारी गड़बड़ी, SOP का पालन नहीं
इनलेट लाइन की हाइड्रो टेस्टिंग लंबे समय तक खिंची रही, जैसा कि सामान्य तौर पर होता नहीं है और ना ही होन चाहिए। 15 गुना दबाव की टेस्टिंग के दौरान भी प्रेशर गेज सही समय पर नहीं हटे। इसकी टेस्टिंग महीनों तक चलती रही। आशंका जताई गई है कि लाइन बार-बार फेल हो रही थी और सही रिपेयर की जगह पैचवर्क किया गया।
4- अनुभवहीन इंजीनियरों की तैनाती भी बड़ी वजह
NIA की जांच में स्टाफ प्रोफाइलिंग में सामने आया कि हादसे वाली शिफ्ट में तैनात कई इंजीनियर अनुभवी नहीं थे, इससे पहले उन्होंने इतना बड़ा प्रोजेक्ट कभी नहीं संभाला, नतीजा ये रहा कि इससे इमरजेंसी संभालने में देरी हुई।

पुरानी रिपोर्ट्स की भी अनदेखी?
सवाल यहां बड़ा ये है कि राजस्थान की ये रिफाइनरी देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी कही जा रही है। ऐसे में यहां के इंजीनियर्स और प्रशासकों को पहले की रिफाइनरियों में हुए इस तरह के हादसों को ध्यान में रखकर चलना चाहिए था। क्योंकि ये कोई पहला मामला नहीं है। 2021 में विशाखापट्टनम रिफाइनरी के CDU-3 यूनिट में भी इसी तरह आग लगी थी। उस समय ऑयल इंडस्ट्री सेफ्टी डायरेक्टरेट (OISD) ने सिफारिशें जारी की थीं कि—
-कार्बन स्टील की जगह एलॉय मटीरियल इस्तेमाल हो
-ऑटोमैटिक वॉल्व अपग्रेड किए जाएं
-स्प्रिंकलर सिस्टम मजबूत किया जाए
बावजूद इसके राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी में इन मानकों की अनदेखी की गई। सवाल ये है कि 79 हजार करोड़ के पचपदरा प्रोजेक्ट में ये सिफारिशें आखिर क्यों लागू नहीं की गईं? इतनी बड़ी रिफाइनरी को बनाने में क्या मानकों को ताक पर रखा गया क्या पीएम मोदी के दौरे की इतनी जल्दबाज़ी थी कि शासन ने भी ना इन मानकों की जांच परख कराने की जिम्मेदारी किसी को सौंपी ना खुद की इसका संज्ञान लिया। नतीजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के महज़ 20 घंटे पहले इतना बड़ा हादसा हो गया।
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